लोकतंत्र की सुंदरता है असहमति: सतीश महाना, यूपी विधानसभा अध्यक्ष ने दिया बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकतंत्र में असहमति के महत्व पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है और सहमति-असहमति दोनों का अपना विशेष स्थान है। इन्हीं विमर्शों से जनकल्याणकारी योजनाओं का निर्माण होता है। यह विचार उन्होंने लखनऊ में आयोजित 86वें पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के 62वें सम्मेलन के समापन सत्र में व्यक्त किए।
महाना ने इस बात पर जोर दिया कि जनता जनप्रतिनिधियों को विकास की जिम्मेदारी सौंपती है, लेकिन विधायिका की असली शक्ति जनता के हितों की रक्षा में निहित है। उन्होंने बताया कि 1921 से शुरू हुए ऐसे सम्मेलन भारतीय लोकतंत्र को दिशा देने में सहायक रहे हैं। इस सम्मेलन में भी देश भर से आए अधिकारियों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यसंस्कृति की सराहना की, जहां पिछले चार वर्षों में सदन केवल दो बार स्थगित हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्ष के आलोचनात्मक सुझावों को भी गंभीरता से लिया जाता है, क्योंकि सभी का लक्ष्य प्रदेश का कल्याण है। महाना ने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन से उत्तर प्रदेश की बदली हुई सकारात्मक छवि पूरे देश में जाएगी।
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