ईरान में विरोध प्रदर्शन के बीच एयरस्पेस बंद, भारतीय उड़ानों पर असर
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच, देश के हवाई क्षेत्र में अप्रत्याशित व्यवधान उत्पन्न हुआ। राजधानी तेहरान के आसपास लगभग पांच घंटे तक एयरस्पेस को बंद रखा गया, जिससे नागरिक उड्डयन पर गंभीर प्रभाव पड़ा। यह बंदी संभवतः मिसाइल लॉन्च या हवाई रक्षा गतिविधियों की आशंका के कारण हुई, जिसने उड़ान सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं। हालांकि, हवाई क्षेत्र को बाद में खोल दिया गया, लेकिन भविष्य में इस तरह की रुकावटों का खतरा बना हुआ है।
इस हवाई क्षेत्र बंदी का सीधा असर भारत की प्रमुख विमानन कंपनियों, जैसे एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट पर पड़ा। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को या तो रद्द करना पड़ा या उनके मार्ग बदलने पड़े। इंडिगो की एक उड़ान, 6ई1808, बंदी से कुछ ही मिनट पहले ईरान के हवाई क्षेत्र से गुजरने वाली आखिरी गैर-ईरानी उड़ान बनने में सफल रही। ईरान का हवाई क्षेत्र पूर्व-पश्चिम उड़ानों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, और इसकी बंदी के कारण एयरलाइंस को वैकल्पिक, लंबे मार्गों का सहारा लेना पड़ा, जिससे उड़ानों के समय में 30 से 60 मिनट की वृद्धि हुई।
एयर इंडिया ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, जहां संभव हो मार्ग परिवर्तन किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ उड़ानों को रद्द भी करना पड़ा है। दिल्ली-न्यूयॉर्क, दिल्ली-नेवार्क और मुंबई-न्यूयॉर्क जैसी महत्वपूर्ण उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसी तरह, इंडिगो की बाकू-दिल्ली उड़ान को बाकू वापस लौटना पड़ा। स्पाइसजेट ने भी यात्रियों से अपनी उड़ानों की स्थिति की जांच करने की सलाह दी।
इस घटना का सबसे तात्कालिक प्रभाव भारतीय यात्रियों पर पड़ा, जो भारत से यूरोप, अमेरिका और मध्य एशिया की यात्रा कर रहे थे। कई यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए, जबकि अन्य उड़ानों में देरी या रद्दीकरण का सामना करना पड़ा। एयर इंडिया ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वैकल्पिक मार्गों के कारण देरी हो सकती है और जहां मार्ग परिवर्तन संभव नहीं है, वहां उड़ानें रद्द की जा रही हैं। इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों को लचीली पुन:बुकिंग या पूर्ण वापसी का विकल्प प्रदान किया।
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़ा यह तनाव वैश्विक विमानन उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा। पर्यटन और व्यावसायिक यात्राओं पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है, खासकर सर्दियों के मौसम में जब यात्राएं बढ़ जाती हैं। वैकल्पिक मार्गों के उपयोग से ईंधन की खपत बढ़ेगी, जिससे एयरलाइंस की लागत में वृद्धि होगी और टिकट की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। लुफ्थांसा जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी ईरान और इराक के हवाई क्षेत्र से बचने का फैसला किया है, जिससे भारत-यूरोप मार्गों पर और देरी हो सकती है। यदि यह स्थिति बार-बार बनी रहती है, तो एयरलाइंस को स्थायी वैकल्पिक मार्गों की तलाश करनी पड़ सकती है, जो मौसम और भू-राजनीतिक जोखिमों से प्रभावित हो सकते हैं।
