ईरान में तनाव बढ़ा, अमेरिकी धमकी के बीच फांसी का डर | Iran Tension
ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बीच न्यायपालिका के रुख में नरमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। देशभर में जारी इन प्रदर्शनों के बीच ईरानी न्यायपालिका ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों के मामलों में तत्काल सुनवाई और फांसी जैसी सख्त सजाओं के संकेत देकर हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। ईरान के मुख्य न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जिन मामलों में कार्रवाई जरूरी है, वह तुरंत होनी चाहिए। उनके इस बयान को अमेरिका की चेतावनी की अनदेखी के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका ‘बहुत सख्त कार्रवाई’ करेगा। ट्रंप ने तेहरान से प्रदर्शनकारियों के साथ इंसानियत दिखाने की अपील भी की है। इस बीच, 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सोलतानी को फांसी की सजा सुनाए जाने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। सोलतानी पर ‘मोहरेबे’ यानी ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया है, जिसकी ईरान के इस्लामी कानून में सजा मौत है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि उन्हें 8 जनवरी को बड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था और बिना निष्पक्ष सुनवाई के सजा सुना दी गई। ईरान ने अमेरिका की धमकियों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी बाहरी दबाव का जवाब दिया जाएगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों के और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच, प्रदर्शनों और इंटरनेट बंदी के बीच सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक ने मुफ्त सेवा शुरू कर दी है। लॉस एंजिलिस स्थित ईरानी मूल के कार्यकर्ता मेहदी याह्यानेजाद ने बताया कि ईरान में स्टारलिंक टर्मिनलों पर मुफ्त सब्सक्रिप्शन पूरी तरह काम कर रहा है। इसे ईरान के भीतर सक्रिय किए गए एक नए स्टारलिंक टर्मिनल के जरिए परीक्षण कर सत्यापित किया गया है। पिछले गुरुवार रात से ईरानी अधिकारियों ने देशभर में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं। स्टारलिंक की ओर से अभी तक इस फैसले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
ईरान में प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, मरने वालों में 2,403 प्रदर्शनकारी और 147 सरकारी कर्मी शामिल हैं। संस्था ने बताया कि मृतकों में 12 बच्चे और नौ ऐसे आम नागरिक भी हैं, जो सीधे तौर पर प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। संस्था का कहना है कि 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण स्थिति का स्वतंत्र और सटीक आकलन करना मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में मृतकों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है। ईरानी सरकार की ओर से भी अब तक हताहतों के आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
राजधानी तेहरान में बुधवार को सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मारे गए सुरक्षा बलों के कर्मियों और अन्य लोगों के लिए सामूहिक अंतिम विदाई का आयोजन किया गया। सरकारी टेलीविजन के अनुसार, इस दौरान 100 से अधिक मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई। तेहरान विश्वविद्यालय के बाहर प्रार्थनाओं के साथ अंतिम संस्कार की शुरुआत हुई, जिसमें इस्लामी गणराज्य के झंडे लहराते हजारों लोग शामिल हुए। ईरानी प्रशासन ने मारे गए लोगों को शहीद बताया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि प्रदर्शनों को कुचलने के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत हुई है। वहीं, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हिंसा के लिए उपद्रवी जिम्मेदार हैं।
संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने ईरान में जारी प्रदर्शनों को लेकर खुलकर समर्थन जताया है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता आजादी की लड़ाई में अकेली नहीं है। डैनन ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जब ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रहा है और विरोधियों को फांसी दे रहा है, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुस्ती चिंताजनक है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में जारी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई को रोकने के लिए एक बार फिर टैरिफ को कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का संकेत दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ कारोबार करेंगे, उनके अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। विश्लेषकों के मुताबिक, इस कदम से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और वहां पहले से 40 प्रतिशत से ऊपर चल रही महंगाई और भड़क सकती है।
