तारीक रहमान की बांग्लादेश वापसी: भारत के लिए क्यों अच्छी खबर, जानिए पूरा मामला
बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ है, जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारीक रहमान लगभग दो दशक बाद ढाका लौट आए हैं। उनकी यह वापसी देश के आगामी चुनावों और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रहमान, जिन्हें कभी बांग्लादेशी राजनीति का ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता था, 17 साल के निर्वासन के बाद गुरुवार को अपनी पत्नी और बेटी के साथ ढाका पहुंचे।
भारत के लिए तारीक रहमान की वापसी के कई मायने हैं। वर्तमान में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का नेतृत्व मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, जिनके कार्यकाल में कट्टरपंथी इस्लामी समूहों की सक्रियता और भारत विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं। विशेष रूप से, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े माने जाने वाले जमात-ए-इस्लामी की वापसी भारत के लिए चिंता का विषय है। हालिया चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में जमात की बढ़ती पैठ देखी गई है, जिसने भारत की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
ऐसे परिदृश्य में, भारत बीएनपी को एक अधिक उदार और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहा है, भले ही दोनों के संबंध ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण रहे हों। नई दिल्ली को उम्मीद है कि रहमान की वापसी से बीएनपी कार्यकर्ताओं में नया जोश आएगा और पार्टी अगले चुनाव में जीत हासिल करेगी। यह भी महत्वपूर्ण है कि वर्तमान सरकार के तहत बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की ओर अग्रसर है, जो भारत के लिए चिंताजनक है।
हाल के दिनों में भारत और बीएनपी के बीच संबंधों को सुधारने के संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में बीमार खालिदा जिया के प्रति चिंता व्यक्त की थी, जिस पर बीएनपी ने आभार व्यक्त किया था। यह घटना वर्षों के कड़वे संबंधों के बाद राजनीतिक गर्मजोशी का एक दुर्लभ उदाहरण था।
भारत के लिए यह राहत की बात है कि रहमान ने अंतरिम सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए हैं और जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन से इनकार किया है। उन्होंने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की विदेश नीति का नारा दिया है, जिसका अर्थ है कि बीएनपी न तो इस्लामाबाद और न ही दिल्ली पर निर्भर रहेगी। रहमान की वापसी से बांग्लादेश की विदेश नीति में भारत के पक्ष में बदलाव की उम्मीद जगी है।
