यूपी में SIR प्रक्रिया पर भाजपा की चिंता बढ़ी, चुनाव आयोग से बढ़ी तारीख की मांग
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम कम होने पर भाजपा की चिंता बढ़ गई है। पार्टी को आशंका है कि इससे आगामी चुनावों में उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी संकेत दिया है कि चुनाव आयोग फॉर्म जमा करने की तारीख को फिर से बढ़ाने पर विचार कर सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस काम को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
भाजपा के भीतर यह चिंता व्याप्त है कि शहरी क्षेत्रों से इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कैसे कम हो रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस मुद्दे पर पड़ताल की है कि क्या SIR से भाजपा को नुकसान हो रहा है और इसके पीछे क्या कारण हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिटेंशन सेंटर बनाने की चर्चाओं के बीच, सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के मतदाता, विशेषकर मुस्लिम मतदाता, मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित कराने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने भाजपा की एक बैठक में कहा था कि SIR को लेकर सपा सहज है और उनके कार्यकर्ता मतदाता सूची में नाम जुड़वा रहे हैं। उनका मानना है कि जो मतदाता सूची से गायब हो रहे हैं, वे अधिकतर भाजपा के ही हैं। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान डिटेंशन सेंटर को लेकर आए निर्देशों ने भाजपा मतदाताओं को यह सोचने पर मजबूर किया कि यह प्रक्रिया उनके लिए नहीं, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं के लिए है।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराया गया था। अब 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए, यदि भाजपा की सीटें 2022 के मुकाबले कम होती हैं, तो योगी को फिर से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसी कारण, मुख्यमंत्री अभी से SIR प्रक्रिया पर विशेष जोर दे रहे हैं ताकि मतदाता सूची में भाजपा समर्थकों के नाम सुनिश्चित हो सकें।
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