पूर्व विधायक मोकिम कांग्रेस से निष्कासित, Odisha Congress में आंतरिक कलह उजागर
ओडिशा में कांग्रेस की आंतरिक कलह एक बार फिर सतह पर आ गई है। पार्टी ने पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब मोकिम ने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा गया एक आलोचनात्मक पत्र सार्वजनिक कर दिया। इस पत्र में मोकिम ने पार्टी के नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए थे।
मोकिम ने अपने पत्र में लिखा था कि कांग्रेस देशभर में राजनीतिक और भावनात्मक रूप से सिमट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपनी विरासत बाहरी विरोधियों के कारण नहीं, बल्कि गलत नेतृत्व और गलत फैसलों के कारण खो रही है। मोकिम ने यह भी दावा किया कि विधायक रहते हुए भी वे तीन साल तक राहुल गांधी से नहीं मिल पाए। उन्होंने बूथ और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा भी उठाया, जिससे चुनावी जीत मुश्किल हो गई है।
मोकिम ने हाल ही में हुए नुआपड़ा उपचुनाव में कांग्रेस की हार पर भी चिंता व्यक्त की थी, जहां पार्टी को 83 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। यह निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास के संसदीय क्षेत्र में आता है। मोकिम ने सवाल उठाया था कि जब नेता अपने क्षेत्र की जनता का विश्वास नहीं जीत पाते, तो कार्यकर्ताओं का भरोसा भी नेतृत्व पर से उठ जाता है।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि निजी तौर पर पत्र लिखना स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन उसे मीडिया में लाना पार्टी विरोधी कदम है। उन्होंने मोकिम पर बीजेपी की मानसिकता के साथ काम करने और भगवा पार्टी के हितों को साधने का आरोप लगाया। दास ने कहा कि पत्र को सार्वजनिक करने से साफ जाहिर होता है कि मोकिम पार्टी में नहीं रहना चाहते थे।
गौरतलब है कि ओडिशा में कांग्रेस की स्थिति लंबे समय से कमजोर बनी हुई है। 1995 के बाद पार्टी सत्ता से बाहर है और धीरे-धीरे बीजद और फिर भाजपा के सामने हाशिए पर चली गई। 2019 में कांग्रेस की सीटों की संख्या घटकर 9 रह गई थी। हालिया निष्कासन की घटना एक बार फिर पार्टी के अंदर नेतृत्व और असहमति को लेकर जारी संघर्ष को उजागर करती है।
