100 उठक-बैठक की क्रूर सजा: 7वीं की छात्रा बेहोश, आवाज गुम; परिजनों ने शिक्षक पर लगाया गंभीर आरोप
बिहार के नवगछिया में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक सातवीं कक्षा की छात्रा को 100 उठक-बैठक लगाने की सजा दी गई। सजा के बाद छात्रा बेहोश हो गई और उसकी आवाज भी गुम हो गई।
गोपालपुर प्रखंड के आदर्श मध्य विद्यालय धरहरा में कक्षा-7 की छात्रा प्रीति कुमारी (11 वर्ष) को उसके सहपाठी के साथ बातचीत करने पर शिक्षक गौरव कुमार ने 100 बार दंड बैठक की सजा दे दी। अत्यधिक शारीरिक थकावट के कारण छात्रा वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी।
बेहोश होने पर महिला शिक्षक शशिकला देवी ने छात्रा के परिजनों को फोन कर कहा- “अपने बच्चे को ले जाइए, बेहोश हो गई है।” स्कूल प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बेहोश बच्ची को प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया गया।
परिजन आनन-फानन में प्रीति को नवगछिया अनुमंडल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहाँ डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद दवाई दी, लेकिन बच्ची की हालत में सुधार न होने पर उसे तुरंत मायागंज अस्पताल, भागलपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची कमजोर थी और अत्यधिक शारीरिक दंड के कारण उसके शरीर में तेज दर्द, थकावट और अस्थायी रूप से आवाज बंद होने जैसे लक्षण दिखाई दिए।
पीड़ित के पिता सूरज भगत ने कहा कि दो बच्चों के बात करने पर ऐसी सजा देना अमानवीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षक खुद स्कूल समय में मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं और बच्चों को ही प्रताड़ित किया जाता है। परिजनों ने कहा- “हमारी बच्ची इतनी सहम गई है कि कुछ बोल भी नहीं पा रही। क्या बच्चों को पढ़ाने का यही तरीका है?”
घटना के बाद इलाके में शिक्षकों के रवैये को लेकर भारी नाराज़गी है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूलों में इस तरह के शारीरिक दंड पर प्रतिबंध होने के बावजूद शिक्षक मनमर्जी से हिंसक दंड देते हैं। लोग शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से आरोपी शिक्षक गौरव कुमार के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
