भ्रष्टाचार के आरोपों पर नेतन्याहू की माफी की मांग, विपक्ष ने किया विरोध
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने माफी का अनुरोध प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे ये मामले देश को तोड़ने का काम कर रहे हैं। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू का साथ देते हुए इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग को चिट्ठी लिखकर उन्हें माफी देने का अनुरोध किया है।
नेतन्याहू का कहना है कि वह इन मामलों से बरी होने तक प्रक्रिया को जारी रखना चाहते थे लेकिन सुरक्षा और राजनीतिक वास्तविकता- राष्ट्र हित- कुछ और ही तय करते हैं। मुकदमे का जारी रहना हमें अंदर से तोड़ रहा है, भयंकर विभाजन पैदा कर रहा है और दरार को गहरा कर रहा है। इन मामलों ने नेतन्याहू के समर्थकों और विरोधियों के बीच विभाजन को भी उजागर किया है। उनके समर्थक इसे राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर रहे हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर मुकदमे का तुरंत अंत होता है तो ये आग को कम करने और व्यापक सुलह को बढ़ावा देने में काफी मदद करेगा, इसकी देश को अभी सख्त जरूरत है। नेतन्याहू के बयान के साथ उनके वकीलों ने राष्ट्रपति को 111 पन्नों का एक पत्र भी सौंपा है। हालांकि उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।
सितंबर में राष्ट्रपति हर्जोग ने संकेत दिया था कि वह नेतन्याहू को माफ कर सकते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि इजरायली प्रधानमंत्री का मामला समाज पर भारी पड़ता है।
अगर एक्सपर्ट्स की मानें तो नेतन्याहू ने जो माफी का अनुरोध किया है वह एक सुनियोजित कदम है। हार्गोज के फैसले में हफ्तों लग सकते हैं और अगर वह माफी दे देते हैं तो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने की भी संभावना है। इसके बाद यह प्रक्रिया और लंबी खिंच जाएगी। अगर इजरायली कानून की बात करें तो माफी सिर्फ दोषी ठहराए गए अपराधी को ही दी जा सकती है।
विपक्ष के नेता यायर लापिड ने जोर देकर कहा कि अगर नेतन्याहू माफी चाहते हैं तो पहले अपराध स्वीकार करें, पश्चाताप व्यक्त करें और राजनीतिक जीवन से तुरंत हट जाना जरूरी। वामपंथी विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के प्रमुख यायर गोलान ने कहा कि केवल दोषी ही क्षमादान मांगते हैं।
सरकार विरोध प्रमुख कार्यकर्ता शिकमा ब्रेस्लर ने कहा कि इजरायल के लोग समझ रहे हैं कि क्या दांव पर लगा है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू न्यायिक व्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश कर रहे थे और यह तेजी से नहीं हो रहा था तब वह राष्ट्रपति के पास गए हैं।
