द्वारका बी और दिचाऊं कलां में भाजपा की प्रचंड जीत, सांसद-विधायक की प्रतिष्ठा दांव पर
दिल्ली नगर निगम उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने द्वारका बी और दिचाऊं कलां वार्डों में बड़ी जीत दर्ज की है। इन महत्वपूर्ण उपचुनावों में भाजपा प्रत्याशियों मनीषा सहरावत (द्वारका बी) और रेखा रानी (दिचाऊं कलां) ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को भारी मतों के अंतर से परास्त किया। यह जीत विशेष रूप से इसलिए अहम है क्योंकि इन सीटों पर क्रमशः सांसद कमलजीत सहरावत और विधायक नीलम कृष्ण पहलवान की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी।
द्वारका बी की सीट सांसद कमलजीत सहरावत के सांसद बनने के कारण रिक्त हुई थी, जबकि दिचाऊं कलां की सीट विधायक नीलम कृष्ण पहलवान के विधायक बनने के बाद खाली हुई थी। दोनों ही नेताओं ने अपने-अपने वार्डों में भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी। सांसद कमलजीत सहरावत ने स्वयं गांव-गांव जाकर जनसंपर्क किया और द्वारका की सोसाइटियों में लोगों से समर्थन मांगा। इसी तरह, विधायक नीलम कृष्ण पहलवान ने भी दिचाऊं कलां वार्ड की कॉलोनियों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। इन नेताओं के अथक प्रयासों के कारण भाजपा प्रत्याशियों की जीत का अंतर काफी बड़ा रहा। द्वारका बी में 9100 मतों के अंतर से तो दिचाऊं कलां में 5637 मतों के अंतर से भाजपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
मतगणना स्थल, द्वारका सेक्टर तीन स्थित एनएसयूटी पर सुबह से ही प्रत्याशियों के समर्थक जुटने लगे थे। हालांकि, जैसे-जैसे मतगणना के रुझान भाजपा के पक्ष में आने लगे, वैसे-वैसे एनएसयूटी के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ता गया। जीत का प्रमाण पत्र मिलते ही दोनों नवनिर्वाचित प्रत्याशियों का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया गया। एनएसयूटी के बाहर भाजपा समर्थकों ने पार्टी के झंडे लहराते हुए जीत का जश्न मनाया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं।
हालांकि, जीत का यह उत्साह नए निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने खड़ी चुनौतियों के सामने फीका पड़ जाता है। उपनगरी द्वारका में कूड़ा प्रबंधन एक गंभीर समस्या है, जिसके समाधान में निगम अब तक विफल रहा है। इसके अतिरिक्त, पार्कों में हरियाली बनाए रखना, पेड़ों की छंटाई, और स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था जैसे मुद्दे भी प्रमुख चुनौतियां हैं। बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटना भी एक अहम कार्य होगा। दिचाऊं कलां क्षेत्र में भी कूड़ा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटों की उपलब्धता, और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था जैसी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। पार्कों का सौंदर्यीकरण और सड़कों की साफ-सफाई भी प्राथमिकता के तौर पर निबटानी होगी।
