ओडिशा सरकार का बड़ा कदम: मंत्रियों को सौंपी गई धान खरीद मंडियों की निगरानी
ओडिशा सरकार ने राज्य में धान खरीद की प्रक्रिया को अधिक सुचारू और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने अब प्रत्येक जिले में मंडी-सम्बंधित जिम्मेदारियों का निर्वहन संबंधित मंत्रियों को सौंपा है। खाद्य आपूर्ति मंत्री कृष्ण चंद्र पात्र ने बुधवार को विधानसभा में इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि इस व्यवस्था के तहत, मंत्रिस्तरीय स्तर की एक समिति का गठन किया गया है ताकि खरीद प्रक्रिया के दौरान बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
इस नई पहल के तहत, प्रत्येक जिले के कलेक्टर अपनी देखरेख में प्रत्येक मंडी के लिए एक-एक अधिकारी की तैनाती करेंगे। ये अधिकारी मंडियों में होने वाली सभी गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेंगे और किसी भी समस्या या बाधा की सूचना तुरंत जिला कलेक्टर को देंगे। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से रिपोर्टिंग करने से खरीद प्रक्रिया की करीबी निगरानी संभव होगी और किसी भी समस्या का समय पर समाधान किया जा सकेगा, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में संबलपुर जिले में खरीफ धान खरीद के दौरान मिलरों के सहयोग न करने के कारण खरीद प्रक्रिया को रोकना पड़ा था। मंडियां तो खुल गईं थीं, लेकिन मिलर स्टॉक उठाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे, जिसके चलते किसान अपनी धान की फसल लेकर मंडियों में प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी, क्योंकि धान से लदी गाड़ियों को मिलों के बाहर रोक दिया गया था और किसानों को रात में विरोध प्रदर्शन भी करना पड़ा था। यह गतिरोध तब उत्पन्न हुआ जब ओडिशा मिलर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक अनुबंधों का नवीनीकरण, सुरक्षा जमा राशि जमा करना या खरीद प्रक्रिया में भाग लेने से इनकार कर दिया था।
वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें जिला आपूर्ति अधिकारी और सहकारी विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे, ने किसानों के साथ चर्चा कर खरीद को सुचारू बनाने का प्रयास किया, लेकिन संचालन बाधित रहा। हालांकि, यह गतिरोध 2 दिसंबर को राज्य सरकार और राइस मिलर्स के बीच एक समझौते के बाद समाप्त हो गया। इसके बाद 3 दिसंबर को बरगढ़ जिले में धान खरीद फिर से शुरू हुई। जिले की पांच मंडियों में कुल 724.79 क्विंटल धान उठाया गया, जिसमें कालापानी और गोड़भागा मंडियों से बड़ी मात्रा में खरीद हुई। इस नई व्यवस्था से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी बाधाएं उत्पन्न नहीं होंगी और किसान अपनी उपज आसानी से बेच पाएंगे।
