दिल्ली की 2400 वक्फ संपत्तियों पर संकट, पंजीकरण की समय सीमा समाप्त
दिल्ली में स्थित 2400 से अधिक वक्फ संपत्तियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। वक्फ संशोधन कानून के तहत उम्मीद पोर्टल पर इन संपत्तियों के पंजीकरण की अंतिम तिथि 5 दिसंबर को समाप्त हो गई, लेकिन एक भी संपत्ति का पंजीकरण पूरी तरह से संपन्न नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार, पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है, जिससे हजारों संपत्तियों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
पंजीकरण प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में ही आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। 2 दिसंबर तक करीब 1,900 संपत्तियों के लिए आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन यह केवल पहला चरण था। पंजीकरण के लिए तीन चरण निर्धारित हैं: पहला आवेदन, दूसरा राजस्व अधिकारियों द्वारा सत्यापन और तीसरा वक्फ बोर्ड की स्वीकृति। इन तीनों चरणों के पूरा होने पर ही संपत्ति को पंजीकृत माना जाएगा।
दिल्ली वक्फ बोर्ड के भंग होने के कारण, अध्यक्ष और समिति के अभाव में, अधिकारी और कर्मचारी ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के बारे में विस्तृत और सूक्ष्म जानकारी तथा आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों को जुटाने और पोर्टल पर भरने में काफी समय लग रहा है। कई संपत्तियों के दस्तावेज अपूर्ण होने के कारण भी पंजीकरण में देरी हो रही है। इसके अतिरिक्त, पोर्टल के धीमे चलने की शिकायतें भी लगातार बनी हुई हैं, जो इस प्रक्रिया को और बाधित कर रही है।
वक्फ संशोधन कानून के अनुसार, यदि 5 दिसंबर तक पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली (प्रबंधक) मामले को वक्फ ट्रिब्यूनल में ले जा सकते हैं। हालांकि, दिल्ली में अभी तक वक्फ ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हुआ है, जिससे यह मामला और पेचीदा होने की आशंका है।
इस मामले पर जमात-ए-इस्लामी हिंद के सह सचिव और वक्फ पंजीयन हेल्प डेस्क के संयोजक इनामुर रहमान ने बताया कि यदि पोर्टल सही तरीके से काम करता तो तय अवधि में प्रक्रिया पूरी हो जाती। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पोर्टल लगभग काम ही नहीं कर रहा है।
इन व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए, मुस्लिम संगठनों ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से पंजीकरण प्रक्रिया की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है। हालांकि, 1 दिसंबर को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम संगठनों को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। इनामुर रहमान के अनुसार, यह समस्या पूरे देश में पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आ रही है।
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