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विजय दिवस: गोली लगने पर भी अडिग रहे जांबाज, दुश्मनों के बंकर ध्वस्त किए

By Dec 2, 2025

भारत-पाकिस्तान के बीच वर्ष 1971 में हुए युद्ध की स्मृतियाँ आज भी देश के वीर जवानों के शौर्य की गाथा कहती हैं। फीरोजपुर बॉर्डर के फलजका सेक्टर में भारतीय सेना के जवान ‘जय श्रीराम’ के नारों से उत्साहित होकर दुश्मन का सामना करने के लिए तैयार थे। अचानक हुए दुश्मन के हमले के बाद भीषण गोलाबारी शुरू हो गई, जिसने रणभूमि का मंजर बदल दिया।

सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर राधेश्याम सिंह भदौरिया, जो उस समय मोर्चे पर तैनात थे, ने उस अविस्मरणीय युद्ध का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे दुश्मन की गोली उनके बाजू को चीरती हुई निकल गई। तेज दर्द और वर्दी पर खून के लाल धब्बे के बावजूद, उनके हौसले पस्त नहीं हुए। उनकी आंखों के सामने उनके साथी, भीष्म सिंह, वीरगति को प्राप्त हुए। भीष्म सिंह के अंतिम शब्द थे, ‘दुश्मन को जाने न देना, अब तुम ध्यान रखना।’

साथी के बलिदान ने राधेश्याम सिंह के भीतर बदले की आग को प्रज्वलित कर दिया। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर दुश्मन के 10 बंकरों को ध्वस्त कर दिया और कई टैंकों को भी नष्ट कर दिया। वे बताते हैं कि हमारे कई साथी इस युद्ध में शहीद हुए, जिससे दुख तो हुआ, मगर आंखों से आंसू नहीं, बल्कि दुश्मनों से बदला लेने का गुस्सा था।

मूल रूप से बाह के खिच्चरपुरा गांव के रहने वाले राधेश्याम सिंह भदौरिया बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे। वर्ष 1969 में उन्होंने 15वीं राजपूत बटालियन में भर्ती होकर अपने सपने को पूरा किया। दो साल बाद ही उन्हें 1971 के युद्ध का अनुभव मिला। उन्होंने बताया कि युद्ध के बारे में सिर्फ सुना था, लेकिन दुश्मन से दो-दो हाथ करने की उनकी इच्छा अब पूरी हो रही थी।

युद्ध के दौरान, पाकिस्तान ने विमानों से बमवर्षा शुरू कर दी थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने एक इंच भी पीछे हटने से इनकार कर दिया। करीब 15 से 20 किलोमीटर के क्षेत्र में गोलाबारी जारी थी। इस दौरान, जनहानि को रोकने के लिए आसपास के गांवों को खाली करा लिया गया था और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। रात के अंधेरे में, लाइट मशीन गन के सहारे आगे बढ़ते हुए, उनकी टुकड़ी ने मौजम पोस्ट पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों का सामना किया। इसी संघर्ष के दौरान, प्रतापगढ़ के रहने वाले उनके साथी भीष्म सिंह को गोली लगी, जिसने राधेश्याम सिंह के संकल्प को और भी मजबूत कर दिया।

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