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पुतिन की भारत यात्रा: S-400, तेल और RuPay-Mir पर होगी अहम चर्चा

By Dec 2, 2025

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत की महत्वपूर्ण यात्रा पर आ रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे, जो दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने का एक अहम कदम साबित होगा। दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय वार्ता भी होगी, जिसमें कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी पुतिन का स्वागत करेंगी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा से भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनमें कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के विस्तार और भारत के चंद्रयान मिशन में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी की भागीदारी प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा के विषय पर भी बातचीत हो सकती है।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच रक्षा, आर्थिक विकास और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। रक्षा क्षेत्र में, भारत रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त यूनिट खरीदने पर विचार कर सकता है। हाल के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में S-400 के प्रभावी प्रदर्शन को देखते हुए, भारत इस दिशा में कदम बढ़ा सकता है। पहले ही पांच S-400 सिस्टम की डील हो चुकी है, जिनमें से तीन भारत को मिल चुके हैं। रूस भारत को अपने उन्नत SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के लिए भी तैयार है, जिस पर भी चर्चा हो सकती है।

आर्थिक मोर्चे पर, यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस से सस्ते तेल की खरीद के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार 2024-25 में लगभग 70 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। हालाँकि, अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण रूसी बैंकों और कंपनियों को भुगतान संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए, भारत और रूस ने भारतीय बैंकों में विशेष रुपया वोस्ट्रो खातों (SRVA) का उपयोग करके एक रुपया-आधारित निपटान प्रणाली शुरू की है। यह 1950 के दशक की पुरानी रुपया-रूबल व्यापार प्रणाली का एक आधुनिक रूप है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अगस्त में नियमों को आसान बनाया ताकि रूसी कंपनियां अपने अतिरिक्त रुपये को भारतीय सरकारी बॉन्ड, स्टॉक और बुनियादी ढाँचे में निवेश कर सकें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा केवल खातों में निष्क्रिय न पड़ा रहे।

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