गया के बाद जमुई को भी ‘जी’ जोड़ने की मांग, बढ़ा सम्मान का प्रतीक
गया जिले के नाम के पीछे ‘जी’ जुड़ने के बाद अब जमुई जिले के नाम के साथ भी ‘जी’ जोड़ने की मांग जोर पकड़ने लगी है। यह मांग भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा नामक संगठन ने उठाई है। संगठन का मानना है कि भगवान महावीर की जननी ‘जमुई’ के नाम के पीछे ‘जी’ शब्द का प्रयोग सम्मान को दर्शाता है और इससे जिले की गरिमा में वृद्धि होगी। इस आशय का प्रस्ताव संगठन की एक बैठक में पारित किया गया है, जिसमें सरकार और प्रशासन से इस दिशा में पहल करने की अपील की गई है।
संरक्षक राम दिनेश शर्मा के आवास पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष चंद्रचूड़ सिंह ने की। बैठक में सर्वसम्मति से जमुई के नाम के पीछे ‘जी’ जोड़ने का प्रस्ताव पारित किया गया। संगठन का तर्क है कि भगवान महावीर की जन्मस्थली होने के नाते जमुई का विशेष महत्व है और इसके नाम के साथ ‘जी’ जोड़ना इस गरिमा के अनुरूप होगा।
प्रस्ताव में केवल नाम के पीछे ‘जी’ जोड़ने की मांग ही नहीं की गई, बल्कि जिले के विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जमुई में हवाई सेवा की अविलंब व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है। यह तर्क दिया गया कि भगवान महावीर की जन्मस्थली के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं, ऐसे में हवाई अड्डे की सुविधा होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। हवाई अड्डा के निर्माण के लिए पर्याप्त जमीन भी जिले में उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त, बैठक में शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सहकारिता विभाग एवं पथ परिवहन विभाग की खाली पड़ी जमीन पर दुकानों का निर्माण कराने की मांग भी उठाई गई। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बंद पड़े शवदाह गृह को अविलंब चालू करने पर भी बल दिया गया।
यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए महिसौड़ी चौक एवं बोधवन तालाब चौक पर लगने वाले जाम को देखते हुए फ्लाइओवर निर्माण की आवश्यकता बताई गई। गिद्धौर एवं सोनो चौक पर भी जाम की समस्या से निपटने के लिए यातायात पुलिस की तैनाती की मांग की गई। साथ ही, सांढ़ एवं लावारिस कुत्तों से जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी व्यवस्थाएं करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा ने यह भी याद दिलाया कि उनके आंदोलनों का ही परिणाम है कि किउल नदी के उस पार जमुई शहर का विस्तार संभव हो सका। हनुमान घाट पर पुल निर्माण के बाद जिला प्रशासन को विभिन्न सरकारी भवनों के निर्माण के लिए 80 एकड़ सरकारी जमीन की उपलब्धता भी सुनिश्चित हुई है। बैठक में संगठन के कई सदस्य उपस्थित रहे।
