पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने राजभवन का नाम बदला, अब ‘लोक भवन’ के नाम से जाना जाएगा
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस ने एक बड़ा और चर्चा का विषय बनने वाला फैसला लिया है। उन्होंने कोलकाता में स्थित अपने आधिकारिक आवास, जिसे अब तक ‘राजभवन’ के नाम से जाना जाता था, उसका नाम बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया है। राज्यपाल के इस कदम से राज्य में राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मची हुई है।
राज्यपाल बोस हाल के दिनों में कई सार्वजनिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने हाल ही में पश्चिम बंगाल से सटी बांग्लादेश सीमा का दौरा किया था। इसके बाद, उन्हें ट्रेन में सामान्य यात्रियों के साथ यात्रा करते हुए देखा गया, जिसने आम जनता के बीच उनकी पहुंच को दर्शाया। इसी क्रम में, एक शिक्षिका के अनुरोध पर उन्होंने अपना कार्यक्रम बदलते हुए एक स्कूल का दौरा किया और वहां के अभ्यर्थियों से मुलाकात की। इन जन-केंद्रित पहलों के बाद, उन्होंने अब अपने आवास का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ करने का निर्णय लिया है, जो उनके ‘लोगों के भवन’ के विचार को दर्शाता है।
राज्यपाल के इस निर्णय को उनके आम लोगों से जुड़ने और सरकारी आवास को जनता के अधिक करीब लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यह नाम परिवर्तन इस बात का संकेत हो सकता है कि राजभवन अब सिर्फ एक प्रशासनिक भवन न होकर, जनता की आवाज सुनने और उन तक पहुंचने का एक माध्यम बनेगा।
इसके पूर्व, राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राज्य की कानून व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर भी अपनी मुखरता दिखाई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश सीमा की स्थिति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजने की बात कही थी। साथ ही, राज्य में एमबीबीएस छात्रा से दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने राजभवन में कथित तौर पर हथियार और गोला-बारूद पाए जाने को लेकर राज्यपाल के खिलाफ थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इन सब घटनाओं के बीच, ‘लोक भवन’ नामकरण का यह फैसला एक अलग ही परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है।
