ट्रंप का कबूलनामा: आइसब्रेकर में अमेरिका रूस से बहुत पीछे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि आइसब्रेकर जहाजों की संख्या के मामले में अमेरिका, रूस से मीलों पीछे है। उन्होंने कहा, “हमारे पास पूरे देश में सिर्फ एक आइसब्रेकर जहाज है, जबकि रूस के पास 48 हैं। यह बेहद हास्यास्पद और शर्मनाक है।” ट्रंप ने इस कमी को उत्तरी ध्रुव (आर्कटिक क्षेत्र) में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है।
इस महत्वपूर्ण अंतर को पाटने के लिए, ट्रंप प्रशासन ने फिनलैंड के साथ एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत, अमेरिका फिनलैंड से 11 अत्याधुनिक आइसब्रेकर जहाजों का ऑर्डर देगा। इस समझौते के अनुसार, चार जहाजों का निर्माण फिनलैंड की शिपयार्ड में होगा, जबकि शेष सात जहाजों को संयुक्त राज्य अमेरिका में बनाया जाएगा। यह डील, जिसकी कुल लागत $6.1 बिलियन है, अक्टूबर 2025 तक पूरी होने की उम्मीद है और यह अमेरिकी कोस्ट गार्ड के बेड़े को मजबूत करेगी।
वर्तमान में, अमेरिकी कोस्ट गार्ड के पास केवल दो फंक्शनल पोलर आइसब्रेकर हैं। इनमें से एक 1976 में लॉन्च किया गया था, जो काफी पुराना है, और दूसरा हाल ही में एक कमर्शियल जहाज को सेवा में शामिल किया गया है। व्हाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के अनुसार, ट्रंप ने आर्कटिक क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि कोस्ट गार्ड को आर्कटिक क्षेत्र में कम से कम नौ आइसब्रेकर की आवश्यकता है।
यह कदम अमेरिका द्वारा आर्कटिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति और क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। हालांकि फिनलैंड से जहाजों का उत्पादन आउटसोर्स करना एक अल्पकालिक समाधान है, इसका मुख्य उद्देश्य क्षमता के इस बड़े अंतर को जल्दी से भरना है। अंततः, नए जहाजों का निर्माण अमेरिका में ही किया जाएगा, जिससे देश की अपनी आइसब्रेकर निर्माण क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल आर्कटिक में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री पहुंच के महत्व को रेखांकित करती है।
