सरोगेट माताओं और सिंगल पिता को चाइल्ड केयर लीव, 48 साल पुराने नियम में बड़ा बदलाव
मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के लिए 48 साल पुराने सिविल सेवा अवकाश नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है। इन संशोधनों के तहत, अब सरोगेट माताओं और एकल पिता को भी संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) की सुविधा मिलेगी। यह निर्णय प्रदेश के साढ़े सात लाख से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होंगे।
वित्त विभाग द्वारा अधिसूचित किए गए ‘अवकाश नियम 2025’ के अनुसार, सरोगेसी के माध्यम से जन्मे बच्चे की मां (कमीशनिंग मां) को मातृत्व अवकाश की पात्रता होगी। वहीं, एकल पुरुष शासकीय सेवक को भी संतान पालन अवकाश दिया जाएगा। यह कदम आधुनिक पारिवारिक संरचनाओं और सामाजिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
इसके अतिरिक्त, दत्तक संतान ग्रहण करने वाले माता-पिता को 15 दिनों का पितृत्व अवकाश मिलेगा। शिक्षकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है, जिसके तहत उन्हें प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश मिलेंगे। इन अर्जित अवकाशों का नकदीकरण सेवानिवृत्ति के बाद किया जा सकेगा, जो सेवाकाल के दौरान अर्जित अवकाशों की कुल संख्या 300 दिन से अधिक नहीं होगी।
संतान पालन अवकाश के नियमों में भी स्पष्टता लाई गई है। इसके तहत, प्रथम 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेंगे, जबकि दूसरी बार अवकाश लेने पर 80 प्रतिशत वेतन का भुगतान किया जाएगा। यह अवकाश 18 वर्ष तक के बच्चे के लिए स्वीकृत किया जा सकेगा। हालांकि, एक वर्ष में तीन बार से अधिक यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। एकल महिलाओं को एक कैलेंडर वर्ष में छह बार अवकाश की पात्रता रहेगी।
पितृत्व अवकाश के संबंध में भी नए नियम स्पष्ट करते हैं कि यह पत्नी के प्रसव की संभावित तिथि से 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से छह माह के भीतर 15 दिनों के लिए स्वीकृत किया जा सकेगा, जिसका पूरा वेतन मिलेगा। सरोगेसी के माध्यम से जन्मे संतान के कमीशनिंग पिता को भी इसी अवधि में 15 दिनों का पितृत्व अवकाश मिलेगा।
यह संशोधन मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 के स्थान पर लागू होगा, जिसमें वर्तमान सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के अनुरूप परिवर्तन किए गए हैं। इन नए नियमों से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के कल्याण और उनके पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
