पेशरार से गोलियों की गूंज थमी, पक्षियों के कलरव से गूंजी वादियाँ
झारखंड का पेशरार, जो कभी गोलियों की तड़तड़ाहट और नक्सलवाद के काले साये के लिए जाना जाता था, आज शांति और विकास की एक नई कहानी लिख रहा है। दशकों के खौफ और हिंसा के बाद, इस क्षेत्र की हसीन वादियाँ अब पक्षियों के मधुर कलरव से गूंज रही हैं। लाल आतंक के खात्मे के साथ, पेशरार ने शांति और समृद्धि के पंख फैलाए हैं, और स्थानीय लोगों के जीवन में नई उम्मीदें जागृत हुई हैं।nnयह परिवर्तन एक लंबी और कठिन यात्रा का परिणाम है। 1980 के दशक में जब नक्सलवाद ने तत्कालीन बिहार और बाद में झारखंड में अपनी जड़ें जमानी शुरू कीं, तब पेशरार भी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रहा। वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन से ठीक पहले, 4 अक्टूबर को पेशरार घाटी में एक IPS अधिकारी की शहादत ने इस क्षेत्र में बदलाव की एक मजबूत नींव रखी। उनके बलिदान ने एक नए उदय का मार्ग प्रशस्त किया, और राज्य गठन के साथ ही नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का मिशन भी तेज हुआ।nnलंबे संघर्ष के बाद, वर्ष 2019 के आसपास पेशरार में शांति और सुरक्षा की स्थिति स्थापित हुई। 2023 तक आते-आते, तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी और विकास की धारा तेजी से बहने लगी। आज, पक्की सड़कें गांवों को आपस में जोड़ रही हैं, और बिजली हर घर तक पहुंच चुकी है। प्रखंड मुख्यालय में सरकारी कार्यालय पूरी तरह क्रियाशील हैं, जिससे आम लोग निडर होकर अपने काम करवा पा रहे हैं। वह समय अब इतिहास बन गया है जब ग्रामीण नक्सली भय के कारण अपने बच्चों को दूर भेजने पर मजबूर थे; आज वे निश्चिंत होकर उन्हें स्कूल भेज रहे हैं। पेशरार में एकलव्य आवासीय विद्यालय की स्थापना, कंप्यूटर शिक्षा और स्मार्ट क्लास का संचालन, यह दर्शाता है कि युवा अब बंदूक की जगह कलम और लैपटॉप उठा रहे हैं।nnस्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक बेहतर अस्पताल का निर्माण हो रहा है, और नदियों पर बने पुलों ने आवागमन को सुगम बना दिया है। दूर-दराज के गांव भी अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले दिन के उजाले में भी अंधेरे का डर सताता था, लेकिन अब गांवों में विकास का शोर सुनाई देता है। प्राकृतिक रूप से संपन्न पेशरार की वादियाँ, जो कभी निर्जन रहती थीं, अब पर्यटकों से गुलजार रहती हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं, छोटे व्यवसाय फल-फूल रहे हैं और अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। पेशरार की प्राकृतिक सुंदरता, जंगल, घाटियाँ और झरने हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं, और अब शांति के वातावरण ने इस सौंदर्य को फिर से जीवंत कर दिया है। पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास पर समान जोर दिया जा रहा है, ताकि यह प्राकृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे।”
लिए सुरक्षित रह सके।
