65 साल के करियर के बावजूद धर्मेंद्र कभी खुद को नंबर-1 नहीं मानते थे
दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र, जिन्होंने 65 वर्षों तक भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी, अब हमारे बीच नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उनका सोमवार को निधन हो गया। 1960 में ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और ‘शोले’, ‘यादों की बारात’, ‘धर्म-वीर’ जैसी अनगिनत सुपरहिट फिल्मों से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई।
अपने शानदार करियर और बेमिसाल अभिनय के लिए जाने जाने वाले धर्मेंद्र के बारे में एक बात जो अक्सर चर्चा में रहती है, वह यह है कि वे कभी भी खुद को इंडस्ट्री में नंबर-1 नहीं मानते थे। इस पर उन्होंने स्वयं एक पुराने इंटरव्यू में विस्तार से बात की थी। 1986 में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में, जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने अपने विचार साझा किए।
धर्मेंद्र ने कहा, “लोगों की तरफ से मुझे बेशुमार प्यार मिला, हालांकि, मैं कभी नंबर-1 नहीं बन पाया। इसके पीछे का कारण ये है कि मैंने एक्टिंग को कभी प्रोफेशन नहीं माना, बल्कि इसे सपने के सच होने जैसा देखा। एक सुपरस्टार बनने के लिए आपको बहुत महत्वाकांक्षी होना पड़ता है, जो शायद मैं कभी नहीं रहा।”
उनकी यह स्वीकारोक्ति उनके विनम्र स्वभाव और कला के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती है। धर्मेंद्र का स्टारडम भले ही आसमान छू रहा था, लेकिन उन्होंने हमेशा जमीन से जुड़े रहने को प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि सफलता के लिए अत्यधिक महत्वाकांक्षा जरूरी है, जो शायद उनके व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं थी। वे अभिनय को एक जुनून के रूप में देखते थे, न कि केवल एक करियर या नंबर-वन बनने की दौड़ के रूप में।
धर्मेंद्र की यह सोच आज भी कई उभरते कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह सिखाती है कि सच्ची सफलता केवल प्रसिद्धि या शीर्ष पर रहने में नहीं, बल्कि अपने काम के प्रति समर्पण और जुनून में निहित है। उनका योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
