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अमृत योजना में हिसार के 50 हजार लोग प्यासे, शुद्ध पानी का इंतजार जारी – Haryana water project delay

By Jan 8, 2026

हिसार में अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) योजना के तहत शुद्ध पेयजल का सपना अभी भी अधूरा है। 2018-19 में शुरू हुई इस परियोजना के लिए निर्धारित समय सीमा मार्च 2020 बीत चुकी है, लेकिन शहर के अनुमानित 50 हजार से अधिक निवासी आज भी नल से शुद्ध पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।

अमृत योजना के पहले चरण में शहर के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की एक परियोजना तैयार की गई थी। इसके तहत एक निजी कंपनी को पुराने शहर और वार्ड-11 में लगभग 136 किलोमीटर लंबी पेयजल पाइपलाइन बिछानी थी। लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से यह काम 2020 तक पूरा होना था, लेकिन 2026 तक भी यह कार्य पूरी तरह से संपन्न नहीं हो पाया है। इसी तरह, सीवरेज लाइन बिछाने का काम, जो 71 करोड़ रुपये की लागत से 50 किलोमीटर से अधिक लंबाई में होना था, उसकी भी समय सीमा मार्च 2020 और फिर 2021-22 तक बढ़ा दी गई थी, लेकिन काम अभी भी अधूरा है।

वार्ड-11 के सातरोड क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। यहां टेंडर लेने वाली पहली कंपनी ने आधा काम अधूरा छोड़कर काम बंद कर दिया था, जिसके बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर नया टेंडर जारी किया गया। हालांकि, नए सिरे से काम शुरू होने के बावजूद गति धीमी है। वार्ड-16 के कुछ इलाकों में भी अमृत योजना के तहत लाइनें बिछाई गई हैं, लेकिन वहां भी जनता को पर्याप्त और शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

जनता के अनुसार, इंजीनियरिंग का काम फाइलों में अधिक और धरातल पर कम हुआ है। हनुमान मंदिर से मिनी बैंक तक बिछाई जा रही लाइनें भी सीधी न होकर टेढ़ी-मेढ़ी बिछाई जा रही हैं। निगरानी की कमी के कारण काम ‘जैसा-तैसा’ मोड में चल रहा है।

जनस्वास्थ्य विभाग अब लगभग 160 करोड़ रुपये की एक नई परियोजना पर विचार कर रहा है। इस राशि से शहर की 40 साल से अधिक पुरानी पेयजल लाइनों को बदला जाएगा, जिससे जनता को शुद्ध पेयजल का सपना साकार करने की उम्मीद है। इस नए प्रोजेक्ट पर 2026 में काम शुरू होने की संभावना है।

हिसार के मेयर प्रवीण पोपली ने बताया कि अमृत योजना में पेयजल लाइन का पहला प्रोजेक्ट अभी जारी है और बचा हुआ कार्य दूसरी एजेंसी कर रही है। साथ ही अमृत 2.0 की भी योजना है और इंजीनियरों से इसकी जानकारी ली जाएगी।

यह देरी जनता के लिए एक बड़ी समस्या है, क्योंकि शुद्ध पेयजल जीवन की मूलभूत आवश्यकता है और इसकी कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सरकार द्वारा इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की आवश्यकता है।

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