50 लाख गबन मामले में इंडियन बैंक के पूर्व प्रबंधक की जमानत याचिका खारिज
बागेश्वर में इंडियन बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक सुमित चौहान को 50 लाख रुपये से अधिक के गबन के मामले में राहत नहीं मिली है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस गंभीर आर्थिक अपराध को देखते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया है।
मामले के अनुसार, सुमित चौहान ने बैंक में कार्यरत रहते हुए सरकारी विभागों के विभिन्न खातों से जमा की गई 50,37,068 रुपये की राशि को फर्जी खातों में स्थानांतरित कर दिया था। यह धोखाधड़ी 2021 में एक विभागीय जांच के दौरान उजागर हुई थी। वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर बैंक प्रबंधन ने सुमित चौहान के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
सत्र न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को ठोस आधार मानते हुए कहा कि आरोपी द्वारा किया गया आर्थिक अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। अदालत ने यह भी पाया कि निचली अदालत द्वारा सुनाया गया निर्णय, जिसमें आरोपी को धारा 409 भारतीय दंड संहिता के तहत एक वर्ष के साधारण कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी, न्यायसंगत है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने जमानत याचिका को आधारहीन बताते हुए उसे खारिज कर दिया। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गोविंद बल्लभ उपाध्याय और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंचल सिंह पपोला ने अदालत में सभी आवश्यक साक्ष्य विस्तार से प्रस्तुत किए।
इस निर्णय के बाद, अभियुक्त सुमित चौहान को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार अल्मोड़ा भेज दिया गया है। यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और बैंक अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले गबन के प्रति कड़े रुख को दर्शाता है।
