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29 वर्षीय धीरेंद्र शास्त्री: देसी अंदाज से लाखों दिलों के बने ‘बागेश्वर बाबा’

By Nov 17, 2025

महज 29 वर्ष की आयु में, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी असाधारण सादगी, ठेठ देसी अंदाज और अल्हड़ व्यवहार से लाखों लोगों को अपना कायल बना लिया है। सामान्य कद-काठी, ढीली-ढाली बगलबंदी और धोती में दिखने वाले यह युवा कथावाचक, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के रूप में जाने जाते हैं। हाल ही में सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के उनके आह्वान पर हजारों की भीड़ सड़कों पर उतर आई, जिसने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।

धीरेंद्र शास्त्री की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका वह अंदाज है जो उन्हें अन्य कई संतों से अलग करता है। उनकी बातचीत की शैली बेहद ठेठ देसी है, जिसमें अपनत्व और हास्य का मिश्रण होता है। वह अपने अनुयायियों से ऐसे मिलते हैं जैसे वे परिवार के सदस्य हों, कभी अल्हड़ अंदाज में मजाक करते हैं तो कभी स्नेहपूर्ण शब्दों से उनका अभिवादन करते हैं। यह सहजता और अपनापन लोगों को गहराई से प्रभावित करता है।

उनकी विन्रमता भी अनुयायियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वह सभी से अत्यंत विनम्रता से मिलते हैं, गले लगते हैं और यहां तक कि अपने से बड़ों और छोटों को भी नाक रगड़कर दंडवत प्रणाम करते हैं, जो लोगों को उनका प्रशंसक बना देता है। उनके संत हृदय की भावुकता भी अक्सर देखने को मिलती है। सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के दौरान, अपनों से मिले दुलार पर वह कई बार भावुक हुए, मंच पर फफक कर रोए और किसी भी परेशानी के लिए विनम्रता से माफी मांगी।

अनुयायियों का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री से जुड़ने का कारण उनकी स्पष्टता और अपनत्व है। रायपुर के दीनानाथ और उनकी पत्नी गायत्री, जो चार वर्षों से बागेश्वर धाम से जुड़े हैं, बताते हैं कि उनकी आस्था का मुख्य कारण कोई लाग-लपेट की बात नहीं, बल्कि उनका सीधा व्यवहार है। जयपुर की सुनीता देवी भी अपनी बहन के साथ पदयात्रा में शामिल हुईं और कहा कि उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका बात करने का अंदाज है, जो उन्हें एक परिवार के सदस्य जैसा महसूस कराता है। यह गहरा मानवीय जुड़ाव ही धीरेंद्र शास्त्री को लाखों लोगों का प्रिय बनाता है।

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