गाजियाबाद में 2025: उद्योगों को मिली संजीवनी, लेकिन जमीन की कमी बनी चुनौती (Ghaziabad industry news)
गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्र के लिए वर्ष 2025 चुनौतियों और सौगातों का मिश्रण लेकर आया। पूरे साल उद्यमी सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे रहे, लेकिन नए उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन की अनुपलब्धता सबसे बड़ी बाधा बनी रही। इस कमी के कारण निवेश और औद्योगिक विस्तार प्रभावित हुआ। इसके अलावा, निर्यात आधारित उद्योगों को अमेरिकी टैरिफ के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, जिससे निपटने के लिए उद्यमियों ने नए बाजार तलाशने और लागत घटाने की रणनीतियां अपनाईं।
वर्ष 2025 में प्रदूषण और यातायात जैसी पुरानी समस्याएं भी प्रभावी ढंग से हल नहीं हो सकीं। बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र की कई सड़कें आज भी निर्माण की बाट जोहती नजर आईं, जहां धूल और खराब बुनियादी ढांचा आमजन के लिए परेशानी का सबब बना रहा। इन समस्याओं के कारण उद्योग अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाए।
इन चुनौतियों के बीच, उत्तर प्रदेश उद्योग विकास निगम (यूपीसीडा) की नई नीति ने गाजियाबाद के औद्योगिक परिदृश्य को संजीवनी दी। इस नीति के तहत, 211 अप्रयुक्त औद्योगिक भूखंडों के मालिकों को अपनी जमीन को विभाजित करके बेचने की अनुमति मिली। इससे छोटे और स्मार्ट उद्योगों, स्टार्टअप्स और नए निवेश के लिए रास्ते खुले।
इसके अलावा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने शहर में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए एक और औद्योगिक क्षेत्र बसाने की तैयारी शुरू की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद, जीडीए ने शहर की आबादी से दूर मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी और डासना समेत अन्य इलाकों में जमीन की तलाश शुरू की। यह औद्योगिक योजना 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में लाई जा सकती है, जिससे भविष्य में औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
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