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20 करोड़ की ठगी: नासिक से दंपती समेत तीन गिरफ्तार, गोरखपुर में 10 केस दर्ज

By Nov 21, 2025

वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र से एक बड़े धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जहां पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से 20 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले एक दंपती समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर एक साल में निवेश की गई धनराशि को तीन गुना करने का लालच देकर सैकड़ों लोगों से ठगी करने का आरोप है।nnसूत्रों के अनुसार, सारनाथ के आशापुर निवासी अमित कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में उपेंद्र नाथ जैसवार उर्फ राजेंद्र जैसवार ने सारनाथ म्यूजियम स्थित पार्क में एक सेमिनार आयोजित किया था। इस सेमिनार में वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और जौनपुर जैसे जिलों के लोग शामिल हुए थे। आरोपियों ने डीडी फाइनेंस सर्विसेज नामक एक फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के माध्यम से शेयर ट्रेडिंग और अन्य प्रोजेक्ट्स में निवेश करने पर एक साल में धन को तीन गुना करने का दावा किया था। इसी झांसे में आकर अमित ने दस लाख रुपये का निवेश किया और अपने रिश्तेदारों को भी प्रेरित किया, लेकिन किसी को भी उनका पैसा वापस नहीं मिला।nnइस मामले में उपेंद्र जैसवार, उसकी पत्नी, पुत्रवधू और अन्य सहयोगियों सहित आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने सर्विलांस सेल की मदद से जांच शुरू की और आरोपियों का लोकेशन महाराष्ट्र के नासिक के गंगापुर में ट्रेस किया। इसके बाद, एक टीम ने वहां दबिश देकर राजेंद्र प्रसाद जैसवार, उसकी पत्नी धनौती देवी और पुत्रवधू संगीता को गिरफ्तार कर लिया। राजेंद्र जैसवार मूल रूप से गोरखपुर के बरईपार का रहने वाला है और उस पर पहले से ही 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।nnजांच में पता चला है कि राजेंद्र जैसवार अपनी पत्नी धनौती के नाम पर डीडी फाइनेंस नामक फर्जी कंपनी चलाता था, जिसका संचालन उसके बेटे उपेंद्र, अनिल और संदीप करते थे। लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए वे जगह-जगह सेमिनार आयोजित करते थे और इंटरनेट मीडिया के जरिए भी संपर्क साधते थे। पुलिस का अनुमान है कि इस गिरोह ने करीब 500 लोगों से 20 करोड़ रुपये की ठगी की है। आरोपियों के पास से फर्जी मुहरें, चेक बुक, पासबुक और पैन कार्ड जैसे कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।nnपुलिस के अनुसार, राजेंद्र और उसकी पत्नी व बेटों के खिलाफ पहले से ही दस मुकदमे दर्ज हैं। ठगों ने महाराष्ट्र को अपना ठिकाना बनाया हुआ था और वे लगातार अपनी पहचान और स्थान बदलते रहते थे। पुलिस ने मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबरों को ट्रैक करके उनका सुराग लगाया और उन्हें पकड़ने में सफलता हासिल की। इस मामले में अभी भी राजेंद्र के तीन बेटों सहित तीन अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।”
तलाश जारी है।

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