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1970 करोड़ के टर्नओवर पर 368 करोड़ GST चोरी, प्रमुख सचिव ने SIT को जांच के निर्देश दिए

By Nov 18, 2025

राज्यकर विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज ने मुरादाबाद में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जीएसटी चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 1970 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर 368 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी एक गंभीर मामला है और ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर रिपोर्ट लखनऊ स्थित विशेष जांच दल (एसआईटी) को भेजी जाए।

प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे फर्जी फर्मों के पूरे नेटवर्क को गहराई से खंगालें और टैक्स चोरी में शामिल सभी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी जुटाएं। उन्होंने कहा कि यह एक संगठित रैकेट का हिस्सा लगता है, इसलिए जांच को सीमित दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होना चाहिए।

बैठक के दौरान, राज्यकर अधिकारियों ने प्रमुख सचिव को प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जीएसटी चोरी करने वाली कई फर्मों की कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं है और न ही उनका व्यवसायिक ढांचा सामान्य मानकों के अनुरूप है। कई फर्में केवल कागजों पर मौजूद हैं और इन्हीं के माध्यम से फर्जी बिलिंग कर टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया है।

प्रमुख सचिव ने प्रत्येक फर्म की भूमिका, उसके व्यवसाय की प्रकृति, बैंक लेनदेन, डिजिटल फुटप्रिंट, जीएसटी पोर्टल पर की गई अपलोडिंग, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और आपसी नेटवर्किंग जैसे बिंदुओं पर बिंदुवार रिपोर्ट मांगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर संदिग्ध गतिविधि की तकनीकी रूप से भी जांच की जाए।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने लंबित टैक्स बकाया की वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एक लाख रुपये से कम के बकायेदारों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई न की जाए। प्रमुख सचिव ने कहा कि लंबे समय से लंबित प्रकरणों को भी अभियान का हिस्सा बनाकर तेजी से निपटाया जाए ताकि राजस्व हानि को रोका जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि कई फर्मों से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण किया जा रहा है। विभाग ने उन फर्मों को भी चिह्नित किया है जिन्होंने फर्जी इनवाइस बनाकर बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दुरुपयोग किया। आईपी एड्रेस ट्रैकिंग, फर्जी पंजीकरण के स्रोत, आपरेट करने वाले व्यक्तियों की पहचान और अन्य राज्यों से प्राप्त इनपुट भी जांच में शामिल किए जा रहे हैं। जिन जिलों से फर्जी फर्मों के संचालन की आशंका है, वहां की टीमों को भी सतर्क कर दिया गया है। प्रमुख सचिव ने जोर देकर कहा कि टैक्स चोरी केवल राजस्व हानि का मामला नहीं है, बल्कि यह ईमानदार व्यापारियों के साथ भी अन्याय है और बाजार में प्रतिस्पर्धा को भी असंतुलित करती है।

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