169 करोड़ की परियोजना फाइलों में अटकी, ढंडेरा नगर पंचायत के लोग परेशान
रुड़की के ढंडेरा नगर पंचायत में सीवरेज और जल निकासी की गंभीर समस्या लोगों के जीवन को दूभर बना रही है। वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा स्वीकृत 169 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित सीवर परियोजना फाइलों में धूल फांक रही है, जबकि नगर पंचायत की 50 हजार से अधिक की आबादी रोज जलभराव, गंदगी और अव्यवस्था का सामना करने को मजबूर है।
नगरवासियों को उम्मीद थी कि 2021 में नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद उनकी वर्षों पुरानी सीवरेज और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। स्थिति इतनी भयावह है कि अशोक नगर के निवासियों ने अपने घरों में गड्ढे खोदकर दैनिक उपयोग से निकलने वाले गंदे पानी को उन्हीं में छोड़ना शुरू कर दिया है। यह तरीका न केवल पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले चार सालों में नगर पंचायत ढंडेरा में किसी भी प्रकार का महत्वपूर्ण विकास कार्य नहीं हुआ है। चाहे वह नाली निर्माण हो, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हो, पथ प्रकाश व्यवस्था हो या सीवरेज लाइनें बिछाना हो, कहीं भी कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। नगर पंचायत बनने के बावजूद, विकास के नाम पर शून्य दिखाई दे रहा है, जिससे स्थानीय लोग खासे नाराज हैं।
समस्या की जड़ें बजट की कमी में भी नजर आती हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत के 11 वार्डों में आवंटित होने वाली वार्षिक ग्रांट का पूरा हिस्सा केवल कर्मचारियों के वेतन भुगतान में ही खर्च हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप, विकास कार्यों के लिए बजट का नाममात्र का भी हिस्सा नहीं बच पाता है, जिससे किसी भी बड़े या छोटे विकास कार्य को शुरू करना असंभव हो जाता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने और परियोजना को जल्द से जल्द पूरा कराने की मांग की है।
