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14 साल बाद हत्या का सच आया सामने, अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

By Nov 28, 2025

पश्चिम चंपारण के बगहा में 14 वर्ष पुराने एक बहुचर्चित हत्या मामले में शुक्रवार को जिला जज चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने अभियुक्त चुन्नू डोम निवासी चौतरवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। लंबे समय से लंबित इस मामले में अदालत के फैसले का सभी को इंतजार था।nnअभियोजन पक्ष के अनुसार, तीन दिसंबर 2011 की रात मुमताज देवी अपने पति डब्लू राम उर्फ डेबा और बच्चों के साथ घर के पास आग ताप रही थीं। इसी दौरान होरिल डोम उर्फ मुशा डोम, विष्णु डोम, देवा डोम, चुन्नू डोम, चंचल डोम, रिपू डोम, सुनील डोम, अरविंद डोम और कुंदन डोम उनके घर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे। जब मुमताज देवी और उनके पति ने मना किया तो आरोपी अपने घरों से लाठी, डंडा और ईंट-पत्थर लेकर वापस आए और हमला कर दिया।nnआरोप है कि होरिल डोम ने डंडे से डब्लू राम के सिर पर वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। इसके बाद सभी आरोपियों ने मिलकर मुमताज देवी पर भी हमला किया, जिससे उन्हें भी चोटें आईं। उन्होंने डब्लू राम को घसीटकर लाठी-डंडों से तब तक पीटा जब तक उनकी घटनास्थल पर ही मौत नहीं हो गई। घटना का कारण पुराने विवाद और दुश्मनी बताई गई। मुशा डोम की डब्लू राम से शादी-विवाह से जुड़े विवाद के चलते दुश्मनी थी, वहीं सुनील डोम से घर-परिवार के झगड़े को लेकर तनाव था। सभी आरोपियों ने शराब पीकर इस घटना को अंजाम दिया था।nnबहस के दौरान बचाव पक्ष ने यह दावा किया कि मुमताज देवी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और अभियुक्त चुन्नू डोम घटना के समय दिल्ली में मजदूरी कर रहा था। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष के इन दावों को खारिज कर दिया। न्यायाधीश मानवेंद्र मिश्र ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति यह दावा करता है कि वह घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसी की होती है।nnअदालत ने पाया कि बचाव पक्ष की ओर से ऐसा कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह सिद्ध हो सके कि चुन्नू डोम घटना के समय दिल्ली या गुड़गांव में किसी नौकरी, उपस्थिति पंजी, वेतन पर्ची, दैनिक मजदूरी, रेल टिकट या किसी कंपनी में कार्यरत था। न ही कोई प्रमाणित नियुक्ति पत्र या पहचान पत्र पेश किया गया। इस कारण अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी घटना के समय घटनास्थल पर ही मौजूद था। इस प्रकार, गवाहों के बयानों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चुन्नू डोम को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।”
वास की सजा सुनाई।”

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