135 साल पुराने स्कूल का जर्जर भवन, 60 बच्चों की जान जोखिम में
बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड क्षेत्र में स्थित करीब 135 वर्ष पुराने मध्य विद्यालय राता का जर्जर भवन अब बच्चों के लिए मौत का सबब बन सकता है। लंबे समय से भवन की बदहाल स्थिति को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सूचित किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और स्थानीय निकाय इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि इसी जर्जर भवन में नव सृजित प्राथमिक विद्यालय राता का संचालन भी किया जा रहा है। यहां लगभग 60 छोटे बच्चे टूटे-फूटे बरामदे में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। यह स्थिति अभिभावकों के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। हर सुबह जब बच्चे विद्यालय जाते हैं, तो उनके मन में यह डर बना रहता है कि वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे या नहीं।
पुराने भवन में कुल चार कमरे और एक बरामदा है, लेकिन ये सभी हिस्से अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। भवन की खस्ताहाली इतनी गंभीर है कि डर के मारे इन कमरों में पढ़ाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। वर्तमान में, केवल नए बने तीन कमरों में ही कक्षा एक से लेकर आठ तक के बच्चों को किसी तरह पढ़ाया जा रहा है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रितु यादव ने बताया कि भवन की हालत बेहद चिंताजनक है और छत कभी भी गिर सकती है, जिससे सभी के जीवन को खतरा है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यालय कक्ष भी जर्जर स्थिति में है और इस संबंध में विभाग को कई बार लिखित रूप से सूचना भेजी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, विद्यालय में एक पुरुष शिक्षक की तत्काल आवश्यकता भी जताई गई है, जिससे शिक्षकों पर काम का बोझ कम हो सके और बच्चों की बेहतर देखभाल हो सके।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि बच्चों के लिए एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। यह उम्मीद की जाती है कि इस गंभीर समस्या पर संज्ञान लेते हुए जल्द से जल्द नवीन भवन निर्माण की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
