114 करोड़ के GST फ्रॉड का खुलासा, SIT करेगी निष्पक्ष जांच
उत्तर प्रदेश में जीएसटी चोरी के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें दो बोगस फर्मों ने कथित तौर पर 114 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी की यह कार्रवाई प्रदेश के 44 जनपदों में जीएसटी चोरी के 188 मामलों की जांच का हिस्सा है, जिसमें गाजीपुर के दो मामले प्रमुख हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन फर्मों ने या तो फर्जी बिलिंग के जरिए कर चोरी की है या फिर जाली दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण कराकर करोड़ों रुपये का गोलमाल किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद एसआईटी इस मामले की तह तक जाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरी तरह तत्पर है। उम्मीद है कि एसआईटी की जांच से जल्द ही इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश होगा और संबंधित फर्मों के संचालकों तथा इसमें शामिल अन्य लोगों से पूछताछ की जाएगी।
गाजीपुर में शहर कोतवाली क्षेत्र के हाथीखाना निवासी एक कपड़ा व्यापारी अजीत कुमार के जीएसटी नंबर से 113.65 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग का मामला लगभग चार महीने पहले सामने आया था। सीजेएम के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने इस मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुप्ता, करंडा निवासी चंदन सिंह और बैंक मैनेजर विनोद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अजीत कुमार अपने कपड़े की दुकान के विस्तार के लिए बैंक से ऋण लेना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने जीएसटी पंजीकरण कराया था। हालांकि, उनके जीएसटी नंबर का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग की गई।
इसी तरह, करंडा क्षेत्र में भी उमेश इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने जाली कागजात के आधार पर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त कर करोड़ों की कर चोरी की। कर विभाग की जांच में पता चला कि फर्म द्वारा बताए गए पते पर कोई भी व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं हो रही थी और न ही अभिलेखों में वास्तविक खरीद या कर भुगतान का कोई प्रमाण था, फिर भी फर्म ने करोड़ों का मुनाफा दिखाया।
यह घटना जीएसटी प्रणाली में खामियों और कुछ लोगों द्वारा इसके दुरुपयोग को उजागर करती है। इस तरह के फ्रॉड न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ईमानदार व्यापारियों के लिए भी मुश्किलें खड़ी करते हैं। एसआईटी की जांच से उम्मीद है कि ऐसे गोरखधंधों पर लगाम लगेगी और जीएसटी प्रणाली की पारदर्शिता बढ़ेगी।
