10 साल की मेहनत लाई रंग: गुरुग्राम की इस सोसायटी ने 3500 निवासियों के साथ मिलकर कचरा प्रबंधन में कायम की मिसाल, बनी ‘जीरो-वेस्ट’ सोसायटी
गुरुग्राम की तेजी से बढ़ती आबादी और कचरे की समस्या के बीच, रिजवुड एस्टेट आरडब्ल्यूए ने एक ऐसी मिसाल पेश की है जो अन्य सोसायटियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। लगभग 10 साल पहले शुरू हुई एक छोटी सी पहल आज एक पूरी सोसायटी को ‘जीरो-वेस्ट’ कालोनी में बदल चुकी है। यह बदलाव केवल नियमों से नहीं, बल्कि 3500 निवासियों के सामूहिक प्रयास और दृढ़ संकल्प से संभव हुआ है।
रिजवुड एस्टेट में 924 फ्लैट और करीब 3500 निवासी हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 500 किलोग्राम कचरा निकलता था। इस कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोकने का सफर आसान नहीं था। इसकी शुरुआत एक महिला निवासी ने घर-घर जाकर लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग करने के फायदों को समझाकर की। शुरुआती दौर में कई परिवारों को दो बिन रखने में परेशानी लगती थी, और कुछ लोग इसे अतिरिक्त मेहनत मानते थे।
शुरुआती चुनौतियों के बावजूद, आरडब्ल्यूए ने इस पहल को आगे बढ़ाया। जागरूकता अभियान चलाए गए, बच्चों को शामिल किया गया और पोस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। निवासियों को यह समझाया गया कि कचरा अलग करना सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने का महत्वपूर्ण कदम है। धीरे-धीरे, यह प्रयास एक आदत में बदल गया।
आज स्थिति यह है कि प्रतिदिन निकलने वाले 500 किलोग्राम कचरे में 350 किलोग्राम गीला कचरा और 150 किलोग्राम सूखा कचरा पूरी तरह से अलग किया जाता है। सोसायटी ने अपना कम्पोस्ट प्लांट भी स्थापित किया है, जहां गीले कचरे को उच्च गुणवत्ता वाली खाद में बदला जाता है। इस खाद का उपयोग सोसायटी के पार्कों और ग्रीन एरिया में होता है, जिससे लैंडफिल पर बोझ कम हुआ है और बागवानी में भी बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।
