इंदौर में हुई त्रासदी के बाद दिल्ली सरकार ने पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को निर्देश दिए गए हैं कि वह संवेदनशील इलाकों में पानी की जांच और...
इंदौर में हुई त्रासदी के बाद दिल्ली सरकार ने पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को निर्देश दिए गए हैं कि वह संवेदनशील इलाकों में पानी की जांच और निगरानी को बढ़ाए, ताकि राजधानी में ऐसी कोई घटना न हो। दिल्ली के जल मंत्री ने एक ‘चेकलिस्ट’ जारी की है, जिसमें सीवर लाइनों के पास से गुजरने वाली पानी की पाइपलाइनों की बारीकी से जांच करने, पानी की गुणवत्ता (क्वालिटी) चेक करने के सिस्टम को बेहतर बनाने और पुराने व खराब पाइपलाइन वाले इलाकों की पहचान कर मरम्मत को प्राथमिकता देने के निर्देश शामिल हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ ने कर्मचारियों और इंजीनियरों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आदेशों का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। पानी के सैंपल इकट्ठा करने के लिए अधिक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त गाड़ियां किराए पर ली जाएंगी। पानी से जुड़ी शिकायतों को दो दिनों के भीतर सुलझाने का आदेश दिया गया है। सीवर लाइन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए विशेष मशीनें लगाई जाएंगी और पानी दूषित होने की समस्याओं का डेटा रोजाना इकट्ठा किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष विभाग भी बनाया जाएगा।
जनता पर प्रभाव
इस कदम से राजधानी के लाखों निवासियों को स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होगा और भविष्य में इंदौर जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।
पृष्ठभूमि
हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा में सीवर का पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने दिल्ली की पानी सप्लाई व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि दिल्ली का एक बड़ा हिस्सा पुराना है और उसे बदलने की जरूरत है। दिल्ली जल बोर्ड के आकलन के अनुसार, शहर के 15,600 किलोमीटर लंबे वाटर नेटवर्क का लगभग 18% हिस्सा 30 साल से भी ज्यादा पुराना है, जिसमें दरारें और लीकेज का खतरा रहता है, जिससे पानी दूषित हो सकता है।
सरकारी प्रतिक्रिया
दिल्ली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड को अपने पूरे सिस्टम की जांच करने और कमजोर हिस्सों की पहचान कर मरम्मत व पाइपलाइन बदलने को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। दिल्ली जल बोर्ड शहर में 9 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, 123 भूमिगत जलाशयों और 15,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए रोजाना लगभग 1,000 मिलियन गैलन पानी की सप्लाई करता है। सरकार ने घनी आबादी वाले इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रखने और सभी ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले पानी की टेस्टिंग और मॉनिटरिंग को मजबूत करने का निर्देश दिया है।
आगे क्या
चिंता की बात यह है कि दिल्ली जल बोर्ड की 25 वाटर क्वालिटी टेस्टिंग लैब के पास NABL मान्यता नहीं है और जांच के तरीके पुराने हो चुके हैं। गैर-सरकारी संगठनों ने सरकार से वर्तमान मॉनिटरिंग सिस्टम की जांच कराने और ‘जल जीवन मिशन’ के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक स्वतंत्र जल गुणवत्ता सचिवालय बनाने की अपील की है।