मिलेनियल डैड: पितृत्व की नई परिभाषा और बदलती सामाजिक भूमिकाएँ
आज के ‘मिलेनियल डैड’ सिर्फ कमाने वाले नहीं, बल्कि बच्चों की परवरिश और घर के कामों में समान भागीदार बन रहे हैं, जो पितृत्व की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। हालांकि, उन्हें कार्यस्थल पर अभी भी रूढ़िवादी सोच का सामना करना पड़ रहा है, बावजूद इसके वे समान पैटरनल लीव और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। यह बदलाव कोरोना महामारी के बाद और भी तेज़ हुआ है, जो आधुनिक परिवारों में लैंगिक समानता की नई कहानी लिख रहा है।
आज के दौर में पुरुष केवल घर के कमाने वाले सदस्य नहीं रह गए हैं। ‘मिलेनियल डैड’ नामक यह नई पीढ़ी बच्चों की परवरिश और घर के कामों में समान रूप से सक्रिय भागीदारी निभा रही है, जिससे पितृत्व की पारंपरिक परिभाषा बदल रही है। ये पिता अब अधिक देखभाल करने वाले और संवेदनशील पार्टनर के रूप में उभर रहे हैं, जो परिवार की जिम्मेदारियों को साझा करने में विश्वास रखते हैं।
हाल ही में ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, हर चार में से तीन पिता अपनी पार्टनर के साथ बच्चों की परवरिश का भार बराबर बांटना चाहते हैं। यह दर्शाता है कि आधुनिक पुरुष अब खुद को केवल ‘ब्रेडविनर’ के बजाय ‘केयरिंग’ और ‘एम्पैथेटिक’ पार्टनर के रूप में देखते हैं। महिलाएं भी इस बदलाव को सकारात्मक मानती हैं, क्योंकि आपसी सम्मान और सहयोग एक संतुलित जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, यह बदलाव चुनौतियों से रहित नहीं है। कई पुरुषों ने बताया कि पारिवारिक कारणों से छुट्टी मांगने पर कार्यस्थल पर उन्हें “पत्नी कहां हैं?” जैसे सवालों का सामना करना पड़ता है, जो यह दर्शाता है कि परिवार की जिम्मेदारी अभी भी महिलाओं के हिस्से में मानी जाती है। दस में से आठ पिताओं ने काम और परिवार के बीच संतुलन बिठाने के तनाव को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने वाला बताया। कई पुरुषों ने सामाजिक या कार्यस्थल के दबाव के कारण पैटरनल लीव लेने से भी परहेज किया।
दिलचस्प बात यह है कि अब पुरुष समान पेड पेरेंटल लीव की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर महिलाओं को बेहतर मैटरनिटी लीव का अधिकार है, तो पुरुषों को भी उतनी ही सहूलियत मिलनी चाहिए। कोरोना महामारी के बाद यह प्रवृत्ति और तेज हुई है, जिसमें पिता अब बच्चों की देखभाल में पहले से अधिक समय दे रहे हैं (54% से बढ़कर 65%)। यह परिवर्तन 30 से 40 वर्ष की आयु के पिताओं में विशेष रूप से देखा गया है, जो कार्यस्थल पर आलोचनाओं के बावजूद परिवार को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये ‘मिलेनियल डैड’ वास्तव में एक नई सामाजिक साझेदारी की नींव रख रहे हैं।
Source: Jagran
