रेवाड़ी: नगर परिषद की भूमि पर प्रॉपर्टी आईडी बनाने का खेल, तीसरी बार में अपडेट हुआ मालिक का नाम
रेवाड़ी शहर की आटो मार्केट के समीप खसरा नंबर 242 की बेशकीमती जमीन पर प्रॉपर्टी आईडी बनाने और उसमें हेरफेर करने के प्रयास पिछले दो वर्षों में तीन बार हुए हैं। पहली दो बार, संपत्ति को नगर परिषद की भूमि बताते हुए आवेदन खारिज कर दिए गए थे। हालांकि, 19 नवंबर को इसी जमीन के लिए तीसरी बार में मालिक का नाम अपडेट कर दिया गया, जिसमें इस बार संपत्ति को खसरा नंबर 242 से बाहर बताया गया।
इस मामले से जुड़े तीनों आवेदनों और उन पर की गई टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट उपलब्ध हैं, जिनसे यह आशंका गहराती है कि इस तीन एकड़ से अधिक भूमि को हड़पने के लिए एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया है। इस जमीन के बड़े हिस्से पर लोगों का कब्जा है और कई कब्जाधारियों ने रजिस्ट्री कराकर प्रॉपर्टी आईडी भी बनवा ली है। नगर परिषद के अधिकारी भी पहले इस भूमि को चकबंदी में अपनी मलकीयत बता चुके हैं।
पहली बार 18 सितंबर 2023 को ऑनलाइन आपत्ति आवेदन किया गया था। नगर परिषद के एटीपी सुनील वर्मा ने एमई (चेकर) नरेश कुमार से स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या यह भूमि नगर परिषद की है। चेकर नरेश कुमार ने लीगल एडवाइजर अधिवक्ता अजीत सिंह की राय का हवाला देते हुए कहा कि खसरा नंबर 242 का मालिकाना हक नगर परिषद के पास है और इस भूमि की प्रॉपर्टी आईडी याशी कंपनी के सर्वे के दौरान बन गई थी। एलए रिपोर्ट के आधार पर आवेदन अस्वीकार किया गया।
दूसरी बार चार सितंबर को इसी खसरा नंबर 242 की प्रॉपर्टी आईडी को लेकर आपत्ति आवेदन किया गया, जिसे मेकर बलराज ने ‘यह संपत्ति खसरा नंबर 242 में आती है और यह मामला डीएमसी और एसडीएम के पास लंबित है’ कहकर आगे बढ़ाया।
इस पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए, उपायुक्त अभिषेक मीणा ने चार अधिकारियों की एक जांच कमेटी गठित की है। यह कमेटी सोमवार से मामले की जांच शुरू कर सकती है। यह जांच इस बात का खुलासा करेगी कि किस प्रकार नगर परिषद की भूमि को निजी संपत्ति के रूप में दर्ज कराने का प्रयास किया गया और इसमें कौन-कौन शामिल थे।
