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नई श्रम संहिताएं: कर्मचारियों के लिए 12 बड़े बदलाव, 21 नवंबर से लागू

By Nov 23, 2025

केंद्र सरकार ने श्रम कानूनों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए 29 पुराने नियमों को समेकित कर चार नई संहिताएं तैयार की हैं, जो 21 नवंबर से प्रभावी होंगी। इन संहिताओं में वेतन संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य भारत के श्रम ढांचे को आधुनिक बनाना, व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देना और श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करना है।

यह बदलाव फुल-टाइम, कॉन्ट्रैक्ट, पार्ट-टाइम या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों की कमाई, नौकरी की शर्तों, लाभों और अधिकारों पर सीधा असर डालेंगे। सूत्रों के अनुसार, इन नई संहिताओं के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

न्यूनतम मजदूरी का अधिकार: अब सभी कर्मचारियों, चाहे वे किसी भी क्षेत्र या वेतन सीमा में काम करते हों, उन्हें न्यूनतम मजदूरी पाने का कानूनी अधिकार होगा। केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन निर्धारित करेगी, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी लाभ मिलेगा।

संशोधित वेतन और टेक-होम वेतन: नई परिभाषा के अनुसार, बेसिक पे कुल सैलरी का कम से कम 50% होना चाहिए। इससे कुछ कर्मचारियों की तत्काल मिलने वाली टेक-होम सैलरी कम हो सकती है, लेकिन यह प्रोविडेंट फंड (पीएफ) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ाएगा, जिससे लंबी अवधि की सेवानिवृत्ति सुरक्षा मजबूत होगी।

गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा: पहली बार, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। एग्रीगेटर्स को अपने वार्षिक टर्नओवर का एक हिस्सा जीवन बीमा, विकलांगता कवर और स्वास्थ्य लाभ जैसे सामाजिक सुरक्षा उपायों के लिए एक समर्पित फंड में योगदान करना होगा।

ग्रेच्युटी की योग्यता में कमी: निश्चित अवधि के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पाने की सेवा अवधि पांच साल से घटाकर केवल एक साल कर दी गई है। यह प्रावधान ऐसे कर्मचारियों को अधिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा।

अनिवार्य नियुक्ति पत्र: नियोक्ताओं को अब हर कर्मचारी को एक नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। यह पत्र रोजगार की शर्तों, वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभों का एक दस्तावेजी प्रमाण होगा, जिससे पारदर्शिता और नौकरी की सुरक्षा बढ़ेगी। यह नियम अनौपचारिक और गिग वर्कर्स पर भी लागू होगा।

ओवरटाइम पर दोगुना वेतन: जो कर्मचारी निर्धारित सामान्य कार्य घंटों से अधिक काम करते हैं, उन्हें उनके सामान्य वेतन दर से कम से कम दोगुना मुआवजा मिलेगा। यह प्रावधान कर्मचारियों के अतिरिक्त काम को उचित मुआवजा सुनिश्चित करेगा।

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