उधमपुर में पुल टूटने से कार खाई में गिरी, पांच घायल
उधमपुर के पखलाई क्षेत्र में एक छोटी सी लापरवाही एक बड़े हादसे का कारण बन गई। बीती रात लगभग 10:30 बजे, बारात से लौट रहे दूल्हे के रिश्तेदारों की कार, अंधेरे में टूटे हुए पुल की जानकारी न होने के कारण, सीधे तवी नदी पर बने दखडु पुल की खाई में जा गिरी। इस हादसे में दो बच्चों सहित पांच लोग घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर होने पर उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू रेफर किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, कार संख्या जेके21जी4581 से यात्रा कर रहे लोग उधमपुर की ओर लौट रहे थे। जब वे दखडु पुल के पास पहुंचे, तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि अगस्त की भारी बारिश में यह पुल बह चुका है। सड़क पर किसी भी तरह का अवरोधक, चेतावनी पट्टी या सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया था, जिससे चालकों को पता चल सके कि पुल टूटा हुआ है और उन्हें वैकल्पिक मार्ग लेना है। इसी अनभिज्ञता के कारण कार सीधे टूटे पुल से नीचे पत्थरों पर जा गिरी।
कार के खाई में गिरने से हुई तेज आवाज ने रात के सन्नाटे को चीर दिया, जो आसपास के घरों में सुनाई दी। स्थानीय निवासी सुनील ने बताया कि धमाके जैसी आवाज सुनकर वे बाहर आए तो देखा कि अंधेरे में कार की लाइटें नीचे खाई में चमक रही थीं। उन्होंने तुरंत अन्य स्थानीय निवासियों की मदद से कार के टूटे शीशे तोड़कर घायलों को बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला। घायलों में दो किशोर और तीन बड़े व्यक्ति शामिल थे। सभी को रात 11 बजे तक जीएमसी उधमपुर पहुंचाया गया।
घायलों की पहचान किरपाल सिंह (59), सेठी सलाथिया (50), त्रिदेव सिंह (13), रशपाल सिंह (50) और शौर्य सलाथिया के रूप में हुई है। जीएमसी उधमपुर से गंभीर रूप से घायल दो लोगों को बेहतर इलाज के लिए जम्मू रेफर किया गया है।
स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) की घोर लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि पुल टूटने के बाद भी किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था या चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए थे। घायलों के एक रिश्तेदार ने बताया कि कुछ दिन पहले हाथ के आकार के दो पत्थर रखे देखे थे, जो दिन में तो दिख जाते हैं लेकिन रात के अंधेरे में बिना रिफ्लेक्टर या साइन बोर्ड के उनका पता लगाना मुश्किल था। उन्होंने कहा कि रोज आने-जाने वालों को शायद इसकी जानकारी हो, लेकिन नए लोगों के लिए यह बहुत खतरनाक है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने स्वयं सड़क पर पत्थर लगाकर मार्ग को बंद करने का संकेत दिया है ताकि भविष्य में कोई और हादसा न हो। लोगों ने सवाल उठाया है कि सड़क कर तो लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं किया जाता।
