यमुनानगर रोडवेज डिपो के बेड़े में 10 नई बीएस-6 मानक वाली बसों के शामिल होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। इन बसों के आने से जिले की अंतर-राज्यीय और लंबी दूरी की सेवाएं...
यमुनानगर रोडवेज डिपो के बेड़े में 10 नई बीएस-6 मानक वाली बसों के शामिल होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। इन बसों के आने से जिले की अंतर-राज्यीय और लंबी दूरी की सेवाएं और अधिक तेज व सुचारू हो जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, ये नई बसें न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएंगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी काफी अनुकूल हैं।
नई बीएस-6 बसों की सबसे बड़ी खासियत इनका इंजन है, जो पुराने मॉडलों की तुलना में काफी कम धुआं और शोर पैदा करता है। साथ ही, ये बेहतर माइलेज भी प्रदान करती हैं। बीएस-6 तकनीक प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित करती है, जो दिल्ली-एनसीआर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगा। यमुनानगर डिपो में परिवहन सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
रोडवेज मुख्यालय ने डिपो की मांग पर इन 10 नई बसों को भेजा है। वर्तमान में यमुनानगर डिपो के पास कुल 190 बसें हैं, जिनमें से लगभग 50 बीएस-6 मानक की हैं। कुछ समय पहले एनसीआर से 27 बीएस-4 बसों को यमुनानगर डिपो में भेजा गया था। अब इन 10 नई बसों के आने से डिपो के बेड़े में बसों की कुल संख्या लगभग 200 हो गई है। इससे लंबी दूरी के रूटों पर यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी और इंतजार का समय भी कम होगा।
नई बसों का चेसिस नंबर जारी हो चुका है और आवश्यक कागजी कार्रवाई भी पूरी कर ली गई है। अब इन बसों को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) से पास कराने की तैयारी चल रही है। आरटीए से मंजूरी मिलते ही इन बसों को तुरंत रूटों पर उतार दिया जाएगा। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि इन पर्यावरण-अनुकूल बसों से शहर में फैल रहे प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
नई तकनीक वाली इन बसों से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि यात्रियों को सफर के दौरान कम शोर और अधिक आरामदायक यात्रा का अनुभव भी मिलेगा। डिपो प्रबंधन का कहना है कि अगले कुछ दिनों में इन बसों को विभिन्न रूटों पर संचालित किया जाएगा। इनमें बेहतर सीटिंग व्यवस्था, उन्नत सस्पेंशन और सुरक्षा के नए मानक शामिल हैं। यात्रियों ने भी बसों की संख्या बढ़ने और समय पर संचालन की उम्मीद जताई है, जिससे उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान हो जाएगी।
बसों की संख्या बढ़ने का सीधा फायदा ग्रामीण रूटों पर भी देखने को मिलेगा। जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का संचालन पर्याप्त नहीं है। अब लंबी दूरी की नई बसों को उन रूटों पर लगाने के बाद कुछ पुरानी बसों को ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा, जिससे वहां भी बसों की उपलब्धता बढ़ेगी। त्योहारों और भीड़भाड़ के समय यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कुल मिलाकर, यह पहल यातायात सेवा में सुधार के साथ-साथ पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।