गाजियाबाद की हवा ‘जहरीली’: AQI 400 पार, 45 लाख लोगों की सांसों पर संकट
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बेहतर जीवन की तलाश में आने वाले लोगों को अब साफ हवा के लिए तरसना पड़ रहा है। गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर इतना गंभीर हो गया है कि शहर की 45 लाख से अधिक आबादी के स्वास्थ्य पर सीधा संकट आ गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 422 दर्ज किया गया, जिसने गाजियाबाद को देश का सबसे प्रदूषित शहर बना दिया है।
यह चिंताजनक स्थिति लगातार पांचवें दिन बनी हुई है। इससे पहले भी 19 और 20 नवंबर को गाजियाबाद का AQI देश में सर्वाधिक दर्ज किया गया था। हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में होने के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से लोनी क्षेत्र की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, जहाँ AQI 465 तक पहुँच गया है, जो अत्यंत गंभीर प्रदूषण का सूचक है। इंदिरापुरम और संजय नगर जैसे इलाकों में भी AQI 400 के पार बना हुआ है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण के तहत विभिन्न प्रतिबंध लागू हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन जारी है। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की टीमें निगरानी कर रही हैं और उल्लंघन पाए जाने पर सीलिंग जैसी कार्रवाई की जा रही है। शुक्रवार को भी वैशाली एक्सटेंशन स्थित एक आरएमसी प्लांट पर सीलिंग की कार्रवाई की गई।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि विभागों को प्रदूषण रोकथाम के लिए ठोस योजना बनाकर पूरी जिम्मेदारी से काम करना होगा। करीब 20 से अधिक विभागों को प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन वे अपनी भूमिका निभाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। जिला प्रशासन को भी रिपोर्ट के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्रशासन ने बढ़ते प्रदूषण के कारण कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में चलाने का भी आदेश दिया है।
क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, पांच निगरानी टीमें तैनात हैं और मानकों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जा रही है। संबंधित विभाग भी अपने स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास कर रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहरवासी हर साल की तरह इस बार भी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
