भगवान आदिनाथ का मोक्ष कल्याण: जिनभक्तों का उत्साह, भव्य शोभायात्रा निकली
नगर में स्थित छदामीलाल महावीर जिनालय में पिछले कई दिनों से चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का समापन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याण दिवस के रूप में हुआ। इस पावन अवसर पर सैकड़ों की संख्या में जिनभक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भगवान आदिनाथ के निर्वाण के अलौकिक क्षणों के साक्षी बने।
महोत्सव के अंतिम दिन, आचार्य वसुनंदी के पावन सानिध्य में, महावीर जिनालय प्रांगण में पीत वस्त्र धारण किए भक्तों ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान आदिनाथ का जिनाभिषेक एवं शांतिधारा की। इसके उपरांत, विधि-विधान के साथ भगवान आदिनाथ की मोक्ष कल्याणक पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस दौरान, जिनभक्तों ने प्रतिमा के सम्मुख अष्ट द्रव्य के अर्घ्य समर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
समारोह स्थल पर कलाकारों द्वारा कैलाश पर्वत की एक अद्भुत झांकी प्रस्तुत की गई, जहां भगवान आदिनाथ को निर्वाण की प्राप्ति होनी थी। कलाकारों ने अत्यंत सजीवता से दर्शाया कि किस प्रकार भगवान आदिनाथ कैलाश पर्वत पर गहन तपस्या में लीन थे, चारों ओर रात्रि का घना अंधकार छाया हुआ था और भोर होने ही वाली थी। जैसे ही भगवान को निर्वाण की प्राप्ति हुई, एक पल में ही चारों ओर दिव्य प्रकाश फैल गया और अंधकार का नामोनिशान मिट गया। इस अद्भुत दृश्य ने उपस्थित सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भगवान आदिनाथ के निर्वाण की प्राप्ति के पश्चात, समूचा प्रांगण ‘भगवान आदिनाथ के जयकारे’ से गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो चारों दिशाओं में घंटे और घड़ियाल स्वयं बज उठे हों। इस अलौकिक क्षण की अनुभूति ने सभी भक्तों को आनंदित कर दिया।
निर्वाण के पश्चात, नव निर्मित जिनालय में भगवान की नई प्रतिमा को विधि-विधान के साथ विराजमान किया गया। इसके उपरांत, एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भक्तिमय वातावरण में झूमते हुए इस ऐतिहासिक पल का उत्सव मनाया। यह पंचकल्याणक महोत्सव, जिसमें भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याण का विशेष महत्व था, सभी उपस्थित भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
