सर्दियों में बाघ-गुलदारों को फिट रखने के लिए रखा जा रहा उपवास, जानिए कारण
सर्दियों के मौसम में जहां इंसान ठंड से बचने के लिए गरमागरम खानपान पसंद करते हैं, वहीं कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर में रह रहे बाघों और गुलदारों को फिट रखने के लिए अनोखा तरीका अपनाया जा रहा है। यहां बाघों को सप्ताह में तीन दिन और गुलदारों को एक दिन उपवास पर रखा जा रहा है, यानी उन्हें मांस नहीं दिया जा रहा है। यह पहल वन्यजीवों के स्वास्थ्य के प्रति प्रशासन के समर्पण को दर्शाती है।
कॉर्बेट के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में वर्तमान में 11 बाघ और 14 गुलदार रह रहे हैं। इन्हें घायल, बीमार या मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण लाया जाता है। शिकार करने की क्षमता खो चुके या अन्य कारणों से जंगल में छोड़े जाने में असमर्थ इन जानवरों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। प्रशासन द्वारा तय डाइट चार्ट के अनुसार, बाघों को प्रतिदिन आठ किलो और गुलदारों को दो किलो भैंस का मांस या चिकन दिया जाता है। हालांकि, वजन को नियंत्रित रखने के लिए बाघों को मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को मांस नहीं दिया जाता, जबकि गुलदारों को केवल मंगलवार को चिकन से दूर रखा जाता है।
कॉर्बेट प्रशासन का मानना है कि रेस्क्यू सेंटर में सीमित जगह के कारण इन जानवरों का चलना-फिरना कम हो जाता है। ऐसे में प्रतिदिन मांस खाने से उनका वजन अनावश्यक रूप से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भैंस के मांस में प्रोटीन और वसा की मात्रा अधिक होती है। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इसका सेवन किडनी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है और वसा शरीर के आंतरिक अंगों में जमा होकर उनकी कार्यप्रणाली को बाधित कर सकती है। बाघों का औसत वजन 250 से 300 किलो तक होता है, और इस अतिरिक्त भार से उन्हें परेशानी हो सकती है।
यह डाइट चार्ट केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वन्यजीव स्वस्थ रहें और उनकी जीवनशैली उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न हो। इसी तरह, नैनीताल चिड़ियाघर में भी भालू, रेड पांडा, ब्लू शीप जैसे अन्य प्राणियों को संतुलित आहार दिया जा रहा है, जिसमें शहद, गुड़ और अंडे जैसी चीजें शामिल हैं।
