अरुण शंकर प्रसाद का मंत्री पद तक का सफर: मधुबनी से राजनीति का नया अध्याय
बिहार की राजनीति में मधुबनी जिले का एक और सितारा चमका है। खजौली विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार विजयी हुए विधायक अरुण शंकर प्रसाद ने मंत्री पद की शपथ लेकर अपने राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। तीसरी बार विधायक बनने वाले प्रसाद पहली बार नीतीश कुमार की कैबिनेट का हिस्सा बने हैं।
64 वर्षीय अरुण शंकर प्रसाद, जो वैश्य समुदाय से आते हैं और मधुबनी जिले के बासोपट्टी प्रखंड मुख्यालय के मूल निवासी हैं, ने हालिया विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार ब्रज किशोर यादव को 13126 मतों के अंतर से हराया। यह जीत उनके राजनीतिक अनुभव और मतदाताओं के विश्वास का प्रमाण है।
प्रसाद का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने 1990, 1995, 2000, फरवरी और अक्टूबर 2005 में हरलाखी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर 2010 में खजौली से पहली बार विधायक बनने में वे सफल रहे। इसके बाद, 2015 में उन्हें राजद के सीताराम यादव से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2020 में उन्होंने सीताराम यादव को बड़े अंतर से हराकर वापसी की। इस बार उन्होंने ब्रज किशोर यादव को हराकर अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज की है।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके अरुण शंकर प्रसाद का वैवाहिक जीवन भी सुखद है। उनकी पत्नी सुनैना देवी एक शिक्षिका हैं। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ा बेटा डॉ. अजीत कुमार मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि छोटा बेटा इंजीनियर है। उनकी सभी पुत्रियां विवाहित हैं।
चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्र के अनुसार, अरुण शंकर प्रसाद और उनकी पत्नी संयुक्त रूप से लगभग 1.47 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। भाजपा के जिला अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं। खजौली सीट पर भाजपा का दबदबा कायम रखने और पहली बार मंत्री बनने तक का उनका सफर, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह नियुक्ति उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
