दिल्ली में 2.24 लाख से अधिक प्रदूषण शिकायतें अनसुलझीं, अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार
दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप के बीच, जनता द्वारा दर्ज कराई गई 2.24 लाख से अधिक शिकायतें अभी भी अनसुलझी पड़ी हैं। यह स्थिति विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के लापरवाह रवैये को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जो प्रदूषण को नियंत्रित करने के बजाय शिकायतों के निवारण में भी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। जनता को अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन उनका प्रभावी ढंग से समाधान न होना एक गंभीर चिंता का विषय है।
हाल ही में, मुख्य सचिव ने वायु प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर जन शिकायत मंचों की एक समीक्षा बैठक की। इस समीक्षा में यह बात सामने आई कि कई प्रमुख विभाग और एजेंसियां शिकायतों के समाधान में बेहद खराब प्रदर्शन कर रही हैं, और आधी से अधिक शिकायतें अभी भी लंबित हैं। दिल्ली सरकार के इस विश्लेषण में ग्रीन दिल्ली ऐप, एमसीडी के 311 ऐप, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के समीर ऐप और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा ट्रैक की गई इंटरनेट मीडिया की शिकायतों के आंकड़े शामिल थे। इन सभी प्लेटफॉर्म पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को सर्वाधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे लंबित शिकायतों का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित करें। विशेष रूप से नवंबर महीने में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता के बिगड़ने को देखते हुए यह निर्देश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। विभागों को प्रत्येक ऐप-आधारित शिकायत प्रणाली के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी आदेश दिए गए हैं, ताकि शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हर लंबित शिकायत प्रदूषण का एक सीधा स्रोत है। चाहे वह खुले में कचरा जलाना हो, धूल नियंत्रण की कमी हो, या अवैध निर्माण से निकला मलबा हो, ये सभी समस्याएं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। ऐप और इंटरनेट मीडिया पर प्राप्त अधिकांश शिकायतें कचरा डंपिंग, खुले में आग लगाना, सड़क की धूल, अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण गतिविधियाँ, यातायात जाम और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से संबंधित हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर तक कुल 314,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें से 41,091 शिकायतें (लगभग 13 प्रतिशत) अभी भी लंबित थीं। सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले विभागों में भारतीय रेलवे (90 प्रतिशत लंबित शिकायतें), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) (86 प्रतिशत) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (53 प्रतिशत) शामिल हैं। वहीं, एमसीडी ने 4 प्रतिशत लंबित शिकायतों के साथ प्रमुख विभागों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की 12 प्रतिशत और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की 30 प्रतिशत शिकायतें लंबित रहीं। दिल्ली जल बोर्ड की भी 25 प्रतिशत शिकायतें लंबित थीं, जिनकी कुल संख्या 15,600 थी।
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