चंडीगढ़ के फेफड़े बीमार: ‘गार्डन ऑफ सिटी’ की ग्रीन बेल्ट अनदेखी का शिकार
चंडीगढ़, जिसे ‘गार्डन ऑफ सिटी’ के रूप में बसाया गया था, आज अपनी ही पहचान खोता नजर आ रहा है। शहर की खूबसूरती का प्रतीक, ग्रीन बेल्ट, जो कभी चंडीगढ़ के फेफड़ों के समान मानी जाती थी, अब अनदेखी और उपेक्षा का शिकार होकर बीमार हो रही है। विशेष रूप से दक्षिणी सेक्टरों में पार्कों की हालत चिंताजनक है, जहां घनी और ऊंची घास उग आई है, जिससे वहां प्रवेश करना भी मुश्किल हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, चंडीगढ़ में छोटे-बड़े पार्कों और ग्रीन बेल्ट की संख्या 1800 से अधिक है। कभी इन पार्कों को थीम-आधारित विकसित किया गया था, जैसे कि सेक्टर-16 का जाकिर हुसैन रोज गार्डन, जिसमें गुलाब की 1700 से अधिक किस्में हैं, या सेक्टर-33 का टैरेस्ड गार्डन, जहां हर साल गुलदाऊदी फूलों का मेला लगता है। बेंबू वैली, जापानी गार्डन, कैक्टस गार्डन जैसी अनेक खासियतें शहर की सुंदरता को बढ़ाती थीं। लेकिन अब यही हरियाली उपेक्षा का शिकार हो रही है।
सेक्टर-50 कम्युनिटी सेंटर के पीछे की ग्रीन बेल्ट की स्थिति बेहद दयनीय है। यहां प्रवेश द्वार तो बने हैं, लेकिन अंदर पांच से छह फीट ऊंची घास उग आई है, जिसमें बड़ी संख्या में पशु चरते हुए देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार नगर निगम अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। सेक्टर-50 के एक निवासी, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘हम बार-बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। ऐसा लगता है कि दक्षिणी सेक्टरों के पार्कों की देखभाल ही नहीं की जाती।’
निवासियों का कहना है कि शहर में एक ओर जहां विकसित और खूबसूरत पार्क हैं, वहीं दूसरी ओर दक्षिणी सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट की हालत खस्ता है। यह शहर में भेदभाव को दर्शाता है और सभी नागरिकों के लिए समान सुविधाओं की मांग को बल देता है। यदि चंडीगढ़ को ‘सिटी ब्यूटीफुल’ बनाए रखना है, तो शहर के इन ‘फेफड़ों’ को तत्काल देखभाल और ध्यान की आवश्यकता है, ताकि वे फिर से अपनी जीवंतता प्राप्त कर सकें।
