यूपी में मदरसा शिक्षकों के वेतन पर कड़े नियम, उपस्थिति की गहन जांच के बाद ही मिलेगा मानदेय
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया को सख्त कर दिया है। अब शिक्षकों को हर महीने अपनी उपस्थिति का प्रमाण पत्र प्रबंधन से प्राप्त कर जमा कराना होगा, जिसके बाद ही उनके वेतन का भुगतान किया जाएगा। सरकार का यह कदम आजमगढ़ के एक ऐसे मदरसा शिक्षक के मामले के सामने आने के बाद उठाया गया है, जो ब्रिटेन में रहते हुए भी उत्तर प्रदेश के एक अनुदानित मदरसे से वेतन प्राप्त कर रहा था।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एटीएस की जांच में आजमगढ़ के एक मदरसे में सहायक अध्यापक आलिया के पद पर तैनात शमशुल हुदा के संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय संबंध सामने आए। शमशुल, जो 1984 से इस पद पर था, 2007 से ब्रिटेन में रह रहा था और 2013 में उसने ब्रिटिश नागरिकता भी हासिल कर ली थी। चौंकाने वाली बात यह है कि 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए वेतन वृद्धि की गई और 2017 में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।
इस घटना ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने और मदरसों में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने अब उपस्थिति की गहन जांच को अनिवार्य बना दिया है। प्रदेश में कुल 561 मदरसे सरकार से अनुदान प्राप्त करते हैं, जिनमें 2.31 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इन मदरसों में 9889 शिक्षक और 8367 शिक्षणेत्तर कर्मचारी कार्यरत हैं।
नए नियमों के तहत, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को मदरसों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, वे वास्तव में मदरसों में उपस्थित होकर अपना कार्य कर रहे हैं या नहीं। हालांकि, उपस्थिति सत्यापन का नियम पहले से मौजूद है, लेकिन इस घटना के बाद इसके कड़ाई से पालन के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का यह कदम अनुदानित शिक्षण संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने और योग्य व उपस्थित शिक्षकों को ही लाभ पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
