अल्मोड़ा: मटेला गांव में गुलदार का आतंक, एक हफ्ते में 10 बार कैमरे में कैद
अल्मोड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार की बढ़ती सक्रियता ने लोगों को गहरी दहशत में डाल दिया है। पिछले एक माह से गुलदार 20 से अधिक पालतू तथा बेसहारा पशुओं को अपना निवाला बना चुका है, जिससे ग्रामीणों की रात की नींद हराम हो गई है। जिला मुख्यालय से सटे इन इलाकों में गुलदार का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं।
जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित मटेला गांव में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है। यहां दो गुलदार लगातार गांव के आसपास दिखाई दे रहे हैं, मानो उन्होंने इसी क्षेत्र को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया हो। ग्रामीणों के अनुसार, ये गुलदार रोजाना सड़कों, पगडंडियों और खेतों के आसपास घूमते नजर आते हैं। रविवार रात को गांव निवासी गोपाल सिंह के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में एक गुलदार की स्पष्ट चहलकदमी कैद हुई। कैमरे में वह गांव के मुख्य रास्ते पर आराम से टहलता दिखाई दे रहा था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले एक सप्ताह में 10 से अधिक बार गुलदार की गतिविधि सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो चुकी है। बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर खेतों में काम करने तक, हर गतिविधि में ग्रामीणों को जान का खतरा सता रहा है। उनकी आशंका है कि “कहीं कोई बड़ी दुर्घटना होने के बाद ही कार्रवाई शुरू न हो।”
ग्रामीणों ने वन विभाग पर कोई ठोस कदम न उठाने का आरोप लगाया है। उन्होंने विभाग से जल्द से जल्द समाधान की मांग करते हुए गांव में गश्त बढ़ाने और पिंजरा लगाने जैसी तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है।
इस संबंध में, रेंजर मोहन राम आर्या ने बताया कि वन विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही है और लोगों को गुलदार से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और रात के समय अकेले बाहर न निकलने की अपील की।
यह समस्या केवल मटेला तक सीमित नहीं है। हाल ही में द्वाराहाट में तीन लोगों पर गुलदार के हमले की खबरें सामने आई थीं, जहां एक युवक का हाथ फाड़ दिया गया था और एक महिला को दांतों में दबाकर दूर फेंक दिया गया था। अल्मोड़ा में भी एक महिला पर गुलदार के जानलेवा हमले में उसके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। ये घटनाएं क्षेत्र में गुलदार के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती हैं, जिससे वन विभाग पर ठोस और त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
