लखनऊ: सेवानिवृत्त डीजीएम को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 47 लाख की ठगी, CBI अफसर बनकर दिया झांसा
लखनऊ में साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी करतूतों से लोगों को निशाना बनाया है। इस बार उनका शिकार उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के एक सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक (डीजीएम) बने, जिन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 47 लाख रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया गया। जालसाजों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का अधिकारी बताकर पूर्व डीजीएम ओम प्रकाश को मनी लॉन्ड्रिंग के एक फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी।
आलमबाग के श्रीनगर निवासी ओम प्रकाश के पास बीते 11 नवंबर को एक फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और उन्हें धमकाते हुए रुपये की मांग की। ठगों ने अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिसकर्मी, जज और एक नकली कोर्ट भी दिखाया। उन्होंने पूर्व डीजीएम को बताया कि उनका मामला मुंबई हाईकोर्ट में चल रहा है। इस तरह उन्हें लगातार डराया-धमकाया गया और कई बार में उनसे 47 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।
दो दिनों तक ओम प्रकाश को मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा गया, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नाम दिया गया। ठगों की मांगें लगातार बढ़ती रहीं, जिसके बाद पीड़ित को आखिरकार ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तत्काल अपने बेटे को इस पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर बृजेश यादव ने बताया कि आईपी एड्रेस की मदद से जालसाजों की तलाश की जा रही है। पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को पकड़ने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। यह घटना एक बार फिर साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या और उनसे बचाव के लिए सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। वरिष्ठ नागरिकों को ऐसे फर्जी कॉल्स और धमकियों से विशेष रूप से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
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