बायोफोर्टिफाइड फसलें सेहत का खजाना: तीन वर्षों में खत्म होगा केमिकल का प्रयोग, जानें पूरी योजना
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अगले तीन वर्षों में फसलों में रसायनों के प्रयोग को पूरी तरह समाप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके स्थान पर बायोफोर्टिफाइड फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी बल्कि मानव स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। इस पहल को ‘सेहत’ (साइंस एक्सीलेंस फॉर हेल्थ थ्रू एग्रीकल्चर ट्रांसफॉर्मेशन) अभियान का नाम दिया गया है।
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने बताया कि इस योजना के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया गया है और इसे प्रभावी बनाने के लिए इंडियन मेडिकल काउंसिल (आईएमसी) के साथ मिलकर अनुसंधान और नवाचार पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने यह जानकारी कानपुर में सीएसए विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में दी।
दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर भारत
डॉ. जाट ने बताया कि भारत दलहन उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इस वर्ष 27.4 मिलियन टन दलहन का उत्पादन हुआ है, और वर्ष 2030 तक 35 मिलियन टन के लक्ष्य को प्राप्त कर देश को आत्मनिर्भर बनाने की योजना है। सरकार चना, अरहर, मूंग, उड़द और मसूर जैसी फसलों को बढ़ावा दे रही है। इसके अनुसंधान और बीज उत्पादन के लिए विशेष बजट भी आवंटित किया गया है। अनुसंधान के लिए 72 करोड़ रुपये और बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान है। यह कार्य कानपुर स्थित भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) सहित देशभर के 20 संस्थानों को सौंपा गया है।
आधुनिक तकनीक से विकसित होंगी नई फसलें
आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डीके यादव ने बताया कि संस्थान के पास एक जीन बैंक है, जिसमें 4.7 लाख फसलों की आनुवांशिक सामग्री सुरक्षित रखी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से इन आनुवांशिक सामग्रियों का विश्लेषण कर नई, अत्यधिक प्रभावी और गुणवत्तायुक्त फसल प्रजातियां विकसित की जाएंगी। वर्तमान में विकसित की जा रही सभी प्रजातियां जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं।
गन्ने की नई प्रजातियों पर भी काम जारी
डॉ. जाट ने यह भी बताया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की खपत बढ़ने के मद्देनजर, नई और अधिक पैदावार देने वाली गन्ने की प्रजातियों का विकास किया जा रहा है। सितंबर में करनाल में गन्ने की एक नई प्रजाति लॉन्च की जाएगी। यह पहल भारत को कृषि क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाएगी, जिसका सीधा लाभ आम जनता के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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