अखिलेश के बयान पर भड़के जयंत चौधरी, अंकित बालियान हत्याकांड पर राजनीति तेज
शामली में युवा गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की सरेआम हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान के बाद राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रमुख जयंत चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
जयंत चौधरी का अखिलेश पर निशाना
अखिलेश यादव ने अंकित बालियान हत्याकांड को जाट समुदाय से जोड़ते हुए आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समुदाय का साथ नहीं दे रहे हैं। इस पर जयंत चौधरी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने अखिलेश के बयान को ‘संवेदनहीन’ करार देते हुए कहा कि किसी भी अपराध में पीड़ित के साथ पूरे समाज की संवेदना होती है। ऐसे समय में मृतक की जाति को तलाशना और उसे राजनीतिक रंग देना मानवीयता के खिलाफ है। जयंत ने स्पष्ट किया कि अंकित बालियान के परिवार को न्याय दिलाना किसी एक जाति या गोत्र का नहीं, बल्कि हर न्यायप्रिय व्यक्ति का कर्तव्य है।
अखिलेश यादव का आरोप
इससे पहले, अखिलेश यादव ने कहा था कि जाट समुदाय के लोग हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं और इसे अपने ऊपर हमला मानकर आक्रोशित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे जाट समाज के आक्रोश और अंकित बालियान के दुखी पिता की सुनेंगे या फिर लखनऊ अग्निकांड की पीड़ित मां की तरह उन्हें भी अनसुना कर देंगे। अखिलेश ने भाजपा पर केवल वोटों की राजनीति करने का आरोप लगाया और उन जाट नेताओं से सवाल किया जो भाजपा के साथ हैं।
सपा सांसद ने की परिजनों से मुलाकात
इस बीच, कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने शुक्रवार शाम को बंतीखेड़ा पहुंचकर अंकित बालियान के पिता सत्यवीर सिंह फौजी और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इकरा हसन ने अंकित के पिता से अखिलेश यादव की फोन पर बात भी कराई, जिन्होंने परिजनों को हर तरह के सहयोग का भरोसा दिलाया। सांसद ने अंकित बालियान की याद में स्मारक बनाने की भी घोषणा की।
इस हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर न्याय की मांग है, वहीं दूसरी ओर जातिगत आधार पर बयानबाजी भी तेज हो गई है। यह घटना आम जनता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है और समाज में विभाजनकारी तत्वों को बढ़ावा दे सकती है।
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