कानपुर देहात जमीन घोटाला: तत्कालीन एडीएम को छोड़ा, जीएम जेल, जांच में बड़ा मोड़
कानपुर देहात के मूसानगर में 4000 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई की है। हिमावत कंपनी के तत्कालीन जीएम एम नरसिम्हा मूर्ति को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं, मामले में आरोपित तत्कालीन एडीएम को एसआईटी ने पकड़ा था, लेकिन जांच में सहयोग के आश्वासन पर उन्हें एक अधिकारी की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। इस बीच, शासन ने जमीन का आवंटन और अनुबंध रद्द कर जमीन को ऊर्जा विभाग और राज्य सरकार के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया है।
यह घोटाला भोगनीपुर के मूसानगर थाना क्षेत्र की करीब 944 हेक्टेयर जमीन के आवंटन से जुड़ा है। यह जमीन पावर प्लांट की स्थापना के लिए लैंको और हिमावत कंपनियों को दी गई थी। आरोप है कि कंपनियों ने बिना पावर प्लांट लगाए जमीन को बैंकों में बंधक रखकर करोड़ों रुपये का लोन लिया और बैंक ऋण की अदायगी नहीं की। जांच में पता चला कि जमीन का आवंटन नियमों के विरुद्ध किया गया था। डीएम के निर्देश पर एसआईटी गठित कर मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें तत्कालीन एडीएम भू अध्याप्ति ओके सिंह और उनके कार्यालय के कर्मचारियों को भी आरोपित बनाया गया है।
एसआईटी ने लखनऊ से तत्कालीन एडीएम को पकड़ा था, लेकिन शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर उन्हें लिखापढ़ी के बाद एक अधिकारी की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। एसआईटी प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश कुमार सिंह ने कहा है कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। इससे पहले, हिमावत कंपनी के सीनियर परियोजना प्रबंधक सुधीर कुमार श्रीवास्तव और लैंको कंपनी के निदेशक बजरंग लाल जांगिड़ को भी जेल भेजा जा चुका है। सरकारी दफ्तरों में हुए हेरफेर की जांच अब अटक गई है, जिससे एसआईटी के अगले कदम का इंतजार है।
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