वाराणसी में आवारा कुत्तों का आतंक, बुजुर्ग पर जानलेवा हमला
वाराणसी के शिवपुरी-शुद्धिपुर क्षेत्र में आवारा कुत्तों का खौफ लगातार बढ़ रहा है। रविवार सुबह, मोटर मैकेनिक मूलचंद उस वक्त दहशत में आ गए जब चार-पांच आवारा कुत्तों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। कुत्तों के झपटने से मूलचंद घबराकर जमीन पर गिर पड़े, जिसके बाद हमलावरों ने उनके हाथ, पैर, पीठ और कमर पर कई जगह बुरी तरह काट लिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े, लेकिन तब तक कुत्ते उन्हें गंभीर रूप से घायल कर चुके थे और मौके से फरार हो गए थे।nnघायल मूलचंद को तत्काल पं. दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें टिटनेस का इंजेक्शन और कुछ सामान्य दवाएं देकर छुट्टी दे दी। हालांकि, अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) और रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (आरआइजी) वैक्सीन की अनुपलब्धता ने पीड़ित को और मुश्किल में डाल दिया। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि एंटी-रेबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो चुका है, जबकि इम्यूनोग्लोबुलिन वैक्सीन कभी आती ही नहीं है। इस स्थिति में, मूलचंद को इलाज के लिए निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ेगा, जो उनके लिए एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।nnमूलचंद ने बताया कि वह अपने परिवार के अकेले कमाऊ सदस्य हैं और उनका एक बेटा आंख और पैर से दिव्यांग है। ऐसे में, इस हमले ने उनके परिवार की चिंता और बढ़ा दी है। इस मामले में अस्पताल के सीएमएस डा. आरएस राम ने कहा कि एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है और डॉक्टर ने वैक्सीन क्यों नहीं लगाई, इसकी जांच कराई जाएगी।nnयह घटना वाराणसी में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को एक बार फिर उजागर करती है। कैमूर से लेकर सोनीपत तक, विभिन्न शहरों से आवारा कुत्तों के आतंक की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिनमें राहगीरों और मवेशियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस बढ़ती समस्या के कारण एंटी-रेबीज वैक्सीन की खपत में भी वृद्धि देखी जा रही है। पहले बंदरों के आतंक की खबरें थीं, और अब कुत्तों का हमला एक और बड़ी आफत बनकर उभरा है।”
सामने आ रहा है।
