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भ्रष्टाचार में सेवानिवृत्त अधिकारी भी नहीं बचेंगे: हाईकोर्ट का सख्त आदेश

By Nov 29, 2025

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त मंशा जाहिर करते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के मामले में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी केवल वेतन अर्जित करना नहीं, बल्कि देश के निर्माण में योगदान देना भी है। इसलिए, सरकारी महकमों में बढ़ते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रयासों के तहत, सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी किसी भी तरह की छूट नहीं मिलनी चाहिए।

अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि आम जनता या उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों को यह अधिकार होना चाहिए कि वे किसी भी सरकारी कर्मचारी, चाहे वह सेवारत हो या सेवानिवृत्त, के सेवाकाल के दौरान की गई लापरवाही या अनियमितताओं की शिकायत कर सकें। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने विपिन चंद्र वर्मा नामक एक सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता (तकनीकी) की याचिका को खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता ने फर्रुखाबाद में अपने कार्यकाल के दौरान पाई गई अनियमितताओं के संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी।

कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की समाज में एक अहम भूमिका होती है और उन्हें जमीनी स्तर पर जनता की विभिन्न शिकायतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, हर शिकायत को केवल राजनीतिक द्वेष से प्रेरित मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने फर्रुखाबाद के सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता को जारी नोटिस में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को याची की सेवानिवृत्ति की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत एक विधायक के साले द्वारा की गई थी, जिन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनियमितताओं की जांच का अनुरोध किया था। इसके बाद जिलाधिकारी को जांच का आदेश दिया गया, जिन्होंने एक तीन सदस्यीय समिति गठित की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि की। याचिकाकर्ता इस समय तक सेवानिवृत्त हो चुका था। जिलाधिकारी द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को यह कहते हुए चुनौती दी गई थी कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी और विभाग के बीच स्वामी-सेवक का संबंध समाप्त हो जाता है, इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा सकती। सरकार की ओर से इस दलील का विरोध किया गया और कहा गया कि केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसका जवाब मांगा गया है, ऐसे में याचिका पोषणीय नहीं है।

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